facebookmetapixel
Advertisement
स्काईरूट के रॉकेट विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष जाएगा ‘मिशन एम्ब्रेस’, कचरा हटाने वाली तकनीक का होगा सफल परीक्षणराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस का भाजपा-संघ पर बड़ा हमला, ट्रस्ट को भंग करने की मांग कीभारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता, $60 करोड़ में ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीदेगा जकार्ताकम गुणवत्ता वाले शेयरों का अत्यधिक मूल्यांकन है सबसे बड़ा जोखिम: विनय पहाड़ियाक्विक कॉमर्स में एमेजॉन और फ्लिपकार्ट की एंट्री से मचा हड़कंप, वितरकों ने FDI नियमों पर उठाए सवालबाजार में स्थिरता आते ही कंपनियों ने QIP से जुटाए ₹16,990 करोड़, अदाणी ग्रुप की डील से आई भारी तेजीकल्ट फिट ने आईपीओ के लिए सेबी के पास जमा किए पेपर, 950 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारीसन फार्मा ने ऑर्गनन का 11.75 अरब डॉलर में किया अधिग्रहण, SBI समेत 11 अलग-अलग बैंकों ने दिया कर्जकनेक्टेड कारों और EVs में हैकिंग का खतरा बढ़ा, सरकार ने वाहन कंपनियों को दिया साइबर ऑडिट का निर्देश53 कंपनियों में प्री-लिस्टिंग लॉक-इन तीन महीने में होगी समाप्त, निवेशकों की रहेगी नजर 

एफएमसीजी फर्मों ने रिटेलरों की आपूर्ति रोकी

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 8:40 AM IST

रोजाना इस्तेमाल होने वाले वस्तुओं (एफएमसीजी) की प्रमुख निर्माता कंपनियों जैसे गोदरेज, मैरिको और डाबर ने प्रमुख आधुनिक रिटेल स्टोरों में से कुछ को माल की आपूर्ति करना रोक दिया है।


एफएमसीजी कंपनियों ने यह कदम भुगतान में होने वाले डिफॉल्ट के कारण उठाया है। गोदरेज समूह के चेयरमैन आदी गोदरेज ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, ‘हमने उन आधुनिक रिटेलरों को आपूर्ति करना बंद कर दिया है, जो करार की शर्तों के मुताबिक भुगतान नहीं कर रहे।’

हालांकि उन्होंने ‘लंबे समय के रिश्तों’ के चलते उन कंपनियों का नाम बताने से इनकार कर दिया जो डिफॉल्ट करने वालों की फेहरिस्त में शामिल हैं।

मैरिको के मुख्य कार्याधिकारी सौगत गुप्ता भी इस बात को मानते हैं कि इस तरह के रिटेलरों से कारोबार करने के वक्त सतर्क हो रही है। उनका कहना है, ‘ये रिटेलर नकदी की समस्या को झेल रहे हैं और इनके साथ कारोबार करते वक्त हम सावधानी बरत रहे हैं।’

एफएमसीजी कंपनियां कड़े वित्तीय चक्र से निकलने के लिए काम कर रही हैं। वहीं दूसरी और आधुनिक स्टोर जैसे आदित्य बिड़ला समूह का मोर, आरपीजी का स्पेंसर, मुकेश अंबानी समूह का रिलायंस फ्रेश, सुभिक्षा, विशाल पिछले दो वर्षों से तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

आर्थिक मंदी और नकद की कड़ी स्थिति के बारे में एंजल ब्रोकिंग के एफएमसीजी क्षेत्र के विशेषज्ञ आनंद शाह का कहना है, ‘कुछ रिटेलर जमीन की कीमतों और किरायों और मांग में कमी के कारण कार्यशील पूंजी की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।’

सलाहदाता फर्म टेक्नोपैक के सलाहकार पूणर्दु कुमार का कहना है, ‘अपने स्टोरों का विस्तार करने, माल खरीदने और परिसंपत्तियों की बुकिंग के चलते रिटेलरों के लिए कार्यशील पूंजी आमतौर पर एक या दो महीनों के लिए अटक गई है।’

नकदी संकट को मात देने के लिए और मुश्किल दौर में खुद को बनाए रखने के लिए आधुनिक रिटेलर एफएमसीजी कंपनियों के साथ मोल-भाव करने की अपनी ताकत को बढ़ाने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं।

विशाल रिटेल के कॉर्पोरेट दफ्तर में मुख्य कार्याधिकारी मनमोहन अग्रवाल का कहना है, ‘हम एफएमसीजी कंपनियों के साथ कर्ज के भुगतान की अवधि को एक महीने और अपैरल और अन्य आपूर्तिकर्ताओं के साथ ढाई महीने तक बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।’

एफएमसीजी कंपनियों को आधुनिक रिटेलरों के कुछ कारोबारी मॉडलों पर भी संदेह है। उदाहरण के लिए ज्यादातर रिटेलर जैसे सुभिक्षा, रिलायंस फ्रेश, स्पेंसर और मोर के स्टोर एक दूसरे के काफी नजदीक-नजदीक हैं।

एक प्रमुख एफएमसीजी कपंनी, जिसने कुछ चुनिंदा स्टोरों और रिटेल शृंखलाओं को आपूर्ति करना बंद कर दिया है, के अधिकारी का कहना है, ‘संगठित रिटेलर भीड़-भाड़ वाले बाजार में एक सीमित संख्या के लोगों के लिए मुकाबला कर रहे हैं।

इसलिए उन्हें वस्तुओं की बिक्री में कमी देखने को मिल रही है और वे भुगतान के मामलों का सामना कर रहे हैं।’

मैकिन्जी की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के अनुमानित 17,500 करोड़ रुपये के रिटेल बाजार में संगठित रिटेलिंग का योगदान 5 प्रतिशत है, जिसके 2015 तक बढ़कर 14 से 18 प्रतिशत होने की उम्मीद है।

अग्रवाल का कहना है, ‘एफएमसीजी और रिटेल क्षेत्रों के बीच रस्साकशी देश में आधुनिक कारोबार के बढ़ने के साथ भी जारी रहेगी और हमने उनसे बेहतर नियम व शर्तों की बात कही है।’

Advertisement
First Published - December 10, 2008 | 10:22 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement