रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कृष्णा-गोदावरी बेसिन से गैस की पहली खेप प्रमुख उर्वरक कंपनियों की 15 यूरिया इकाइयों को उपलब्ध होगी।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, लाभान्वित उर्वरक कंपनियों में चंबल फर्टिलाइजर्स ऐंड केमिकल्स, इफको, कृभको, टाटा फर्टिलाइजर्स और इंडो-गल्फ फर्टिलाइजर्स का नाम शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक उर्वरक कंपनियों की जरूरतें पूरी करने के बाद यदि गैस बची तो ऊर्जा कंपनियों में, प्राथमिकता के आधार पर, इसकी आपूर्ति रत्नागिरी गैस ऐंड पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (दाभोल पावर कंपनी) को की जाएगी।
आरजीपीपीएल को इस साल अक्टूबर से कृष्णा-गोदावरी बेसिन से प्रतिदिन 84 लाख घनमीटर (एमसीएमडी) गैस मिलनी है। यही नहीं आरजीपीपीएल ने गेल से भी प्रतिदिन 54 लाख घनमीटर गैस की आपूर्ति के लिए करार किया है।
इसके लिए आरजीपीपीएल आरआईएल को 5.60 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (परिवहन शुल्क और कर सहित) का भुगतान करेगी। गैस की आपूर्ति होने पर आरजीपीपीएल अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमता का पूरा दोहन (2,150 मेगावाट) कर सकेगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ”रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने फैसला कर लिया है।
हमने अपने निर्णय से ऑपरेटर को अवगत करा दिया है। इसके लिए हमने गैस यूटिलाइजेशन पॉलिसी का सहारा लिया और तय किया कि सबसे पहले उर्वरक कंपनियों को गैस की आपूर्ति की जाएगी। आरजीपीपएल भी प्राथमिकता के आधार पर लाभान्वितों की सूची में है।”
पिछले हफ्ते दिल्ली में ऊर्जा और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें सदस्यों ने गैस यूटिलाइजेशन पॉलिसी और मंत्रियों के अधिकृत समूह के निर्णय का अनुकरण करने का फैसला लिया गया।
गैस यूटिलाइजेशन पॉलिसी के मुताबिक उर्वरक और ऊर्जा कंपनियों को गैस वितरण में तवाो मिलेगी। मालमू हो कि देश भर के यूरिया उत्पादक संयंत्र नैफ्था का इस्तेमाल करते रहे हैं।
इन संयंत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि नैफ्था या आयातित गैस के इस्तेमाल से उनकी लागत दोगुनी से ज्यादा बढ़ जाती है। उर्वरक कंपनियों को इस समय प्रतिदिन 4.1 करोड़ घनमीटर गैस चाहिए जबकि उन्हें महज 2.8 करोड़ घनमीटर गैस प्रतिदिन मिल पा रही है।