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कर्ज मिलने के बावजूद जेएलआर में फीलबैड

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:10 AM IST

यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) की ओर से पिछले हफ्ते करीब 2,500 करोड़ रुपये मंजूर होने के बावजूद टाटा की जगुआर लैंड रोवर की हालत खस्ता है।
गौरतलब है कि ईआईबी की यह वित्तीय सहायता जेएलआर को पर्यावरण अनुकूल कार विकसित करने के लिए मिली है। जेएलआर हालांकि ब्रिटिश सरकार से दरख्वास्त कर रही है कि उसे केवल नई तकनीक विकसित करने के ही लिए नहीं बल्कि कंपनी चलाने के लिए भी कर्ज मिलना चाहिए।
मालूम हो कि टाटा समूह ने मार्च 2008 में फोर्ड से उसके दो महत्वपूर्ण ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर अपने कब्जे में ले लिए थे। उसके बाद समूह ने करोड़ों पाउंड की राशि इनमें लगा दी है, लेकिन कंपनी की जरूरतें इससे कहीं अधिक बड़ी हैं।
जेएलआर संकेत दे रही है कि उसकी हालत दुरुस्त करने और 14,500 कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रखने के लिए ईआईबी से मिली यह सहायता पर्याप्त नहीं है। प्रेक्षकों के मुताबिक, जेएलआर को बचाना न केवल कर्मचारियों के लिए बल्कि ब्रिटेन के वाहन उद्योग और सरकार के लिए भी काफी जरूरी है।
बर्मिंघम बिजनेस स्कूल और क्षेत्रीय अध्ययन संगठन के प्रोफेसर डेविड बेली ने बताया, ”ब्रिटेन के वाहन उद्योग पर होने वाले कुल अनुंसधान और विकास खर्च का तकरीबन आधा यानी 40 करोड़ पौंड जेएलआर ही खर्च करती है। यही नहीं, ग्रीन कार तकनीक के विकास पर और 80 करोड़ पौंड खर्च करने की कंपनी की योजना है। यहां अभी 14,500 कर्मचारी काम कर रहे हैं, इसके अलावा सप्लाई के लिए 60,000 लोग काम करते हैं।
वैट, नैशनल इंश्योरेंस और दूसरे कर के मद में यह कंपनी ब्रिटिश सरकार को 1.3 अरब पौंड का योगदान करती है।” बहरहाल, कंपनी की खराब सेहत बरकरार रहने से जगुआर के मुख्य संयंत्र कैस्टल ब्रॉमविच के 2,000 कर्मचारियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा हुआ है।
कैस्टल ब्रॉमविक में कार्यरत एक वरिष्ठ कर्मचारी एड्रियन प्रेंटिस ने ईआईबी से कंपनी को सहायता मिलने पर खुशी जताई। उसने कहा, ”कंपनी के ये बुरे दिन बहुत ही जल्द बीत जाएंगे। अच्छे दिन जल्द ही आने वाले हैं।” दूसरी ओर, बेली ने बताया कि हालात बेहतर होने में अभी वक्त लगेगा। उन्होंने बताया कि जब से मैंने वाहन उद्योग को देखा है, मौजूदा स्थिति सबसे बदतर है।
हालांकि बेली की नजर में जनरल मोटर्स की तुलना में जेएलआर की स्थिति बेहतर है। मंदी ने जब दुनिया को अपनी चपेट में लिया, तब इसका परिचालन सरप्लस रहा। बेली के मुताबिक, बगैर ब्रिटिश सरकार की सहायता के कंपनी के लिए बुरे दिन से उबरना संभव नहीं है।
मिलेगी और सहायता
जेएलआर ब्रिटिश सरकार और बैंकों से 80 करोड़ पौंड की वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए बातचीत के अग्रिम चरण में है। यह इस बात पर निर्भर है कि कंपनी आवश्यक कर्र्ज के लिए सरकार और रॉयल बैंक आफ स्कॉटलैंड और वाणिज्यिक बैंकों को पर्याप्त सुरक्षा पत्र उपलब्ध कराती है या नहीं।

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First Published - April 13, 2009 | 1:46 PM IST

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