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एफडीए की चहेती देसी कंपनियां

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Last Updated- December 10, 2022 | 7:06 PM IST

आज की तारीख में भले ही देश की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी रैनबैक्सी को अमेरिका लाख दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन देसी दवा उत्पादक कंपनियों का मन दुनिया के इस सबसे बड़े दवा बाजार से खट्टा नहीं हुआ है।
उल्टे वे वहां जोर-शोर से मोटा दांव लगा रहे हैं। पिछले साल अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (एफडीए) ने जितनी जेनरिक दवाओं को मंजूरी दी थी, उनमें से 30 फीसदी दवाएं अकेले भारतीय दवा कंपनियों की थीं। आंकड़ों के मुताबिक यह 2007 के मुकाबले 26.5 फीसदी ज्यादा था।
यह टे्रंड अभी बरकरार रहने की उम्मीद है क्योंकि साल के पहले दो महीनों एफडीए ने जिन एएनडीए को मंजूरी दी है, उनमें से 35 फीसदी तो भारतीय दवा कंपनियों की हैं। एएनडीए उस आवेदन को कहते हैं, जिसे एफडीए के पास जेनरिक दवाओं की मंजूरी हासिल करने के लिए कंपनियां जमा करती हैं।
रैनबैक्सी को छोड़ दें, तो डॉ. रेड्डीज, वॉकहार्ट, अरबिंदो और सन फार्मा सबने एफडीए की मंजूरी हासिल की दर में या तो इजाफा किया है या फिर उसे बरकरार रखी है। विश्लेषकों की मानें एफडीए की तरफ से भारतीय दवा कंपनियों को मिल रही ज्यादा मंजूरियां रैनबैक्सी की दिक्कतों को बढ़ा सकती है।
एफडीए पहले ही कंपनी की मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की दो उत्पादन केंद्रों पर प्रतिबंध लगा चुका है। साथ ही, उसने कंपनी की 30 आयतित दवाओं पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। विश्लेषकों के मुताबिक यह रैनबैक्सी की दिक्कतें ज्यादा और भारतीय जेनरिक दवा निर्माताओं की दिक्कतें कम लग रही हैं।
जिन देसी जेनरिक दवा निर्माता कंपनियों को एडीए की मंजूरी मिली है, उसमें सबसे ऊपर नाम है सन फार्मा का। उसकी 30 दवाओं को पिछले साल एफडीए की मंजूरी मिली, जबकि 2007 में उसकी 20 दवाओं को मंजूरी मिली थी। इसमें उसकी अमेरिकी सहयोगी कंपनी काराको को मिली मंजूरियां भी शामिल हैं।
वॉकहार्ट को पिछले साल 18 जेनरिक दवाओं के लिए मंजूरी मिली, जबकि 2007 में उसकी 13 दवाओं को मंजूरी मिली थी। डॉ. रेड्डीज की 14 दवाओं को एफडीए की मंजूरी मिली। इस साल भी कंपनी की 5 दवाओं को अब तक एफडीए की मंजूरी मिल चुकी है।
दूसरी तरफ, रैनबैक्सी की सिर्फ 3 दवाओं को एफडीए की मुहर हासिल हो पाई, जबकि 2007 में उसकी 13 दवाओं को मंजूरी मिली थी। जुलाई से लेकर नवबंर के दौरान तो कंपनी को एक भी मंजूरी नहीं मिली।

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First Published - March 6, 2009 | 1:13 PM IST

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