मंदी के कारण घट रही बिक्री को बढ़ाने के लिए एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां अब विज्ञापनों पर ज्यादा खर्च करने की योजना बना रही हैं।
बिक्री में बढ़ोतरी करने के लिए मैरिको, गोदरेज, केविन केयर जैसी दिग्गज कंपनियां नए उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र की तमाम नामी कं पनियां उत्पादों के लिए विज्ञापनों और ब्रांडिंग पर भी ज्यादा खर्च करने की योजना बना रही हैं।
चालू कै लेंडर वर्ष में जनवरी-सितंबर तक एफएमसीजी कंपनियों ने 15-20 फीसदी की दर से विकास किया है। बोस्टन कंसल्टिंग समूह के निदेशक अभीक सिंघी ने बताया, ‘इस विकास दर में 50 फीसदी हिस्सेदारी उत्पादों की बढ़ती कीमत और बाकी 50 फीसदी बिक्री के कारण है।’
एंजेल ब्रोकिंग एफएमसीजी क्षेत्र के विश्लेषक आनंद शाह ने बताया, ‘एफएमसीजी उद्योग नए उत्पाद और ब्रांड को बढ़ावा देते रहेंगे।’ उन्होंने बताया, ‘साल 2009-2010 तक एफएमसीजी उत्पादों के दाम स्थिर हो जाएंगे। ऐसे में उद्योग को दहाई में विकास दर बनाए रखने के लिए बिक्री बढ़ानी पड़ेगी।’
मैरिको के मार्केटिंग प्रमुख समीर सतपती ने बताया, ‘बाजार के बुरे हालात के बाद भी उत्पादों की मार्केटिंग पर ज्यादा खर्च करना हमारी मजबूरी है।’ उन्होंने बताया कि अभी तक तो कंपनी के उत्पादों की मांग में कोई कमी नहीं आई है। लेकिन फिर भी बुरे हालात के लिए तैयार रहना ही पड़ेगा। समीर ने बताया, ‘हम उस नाव पर सवार हैं जिसमें कई छेद हैं। यह नाव कभी भी डूब सकती है। हमारे हित में सिर्फ यही बात है कि हम अभी नाव के सूखे हिस्से में ही हैं।’
संकट के इस हालात में मैरिको ने हेयरकेयर, ब्यूटी और वेलनेस उत्पादों के अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करेगी। सतपती ने बताया, ‘ब्रांड का नवीनीकरण करने का यही सबसे सही समय है। आने वाले 3-4 महीनों में कई नए उत्पाद भी लॉन्च होने हैं। हम सभी श्रेणियों में अपने उत्पाद पोर्टफोलियो बढ़ाएंगे।’
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के अध्यक्ष और कार्यकारी निदेशक एच के प्रेस ने बताया, ‘एफएमसीजी क्षेत्र की सभी कंपनियां एक जैसा ही सोच रही हैं। हम भी अच्छे रिटर्न की उम्मीद में उत्पादों की ब्रांडिंग पर खर्च करते रहेंगे।’
केविन केयर के उपाध्यक्ष (मार्केटिंग) रमेश विश्वनाथन ने बताया, ‘चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 2010 में हम विज्ञापनों पर होने वाले खर्च को बढ़ाएंगे। घटते मार्जिन को बढ़ाने के लिए यह सब करना हमारे लिए बहुत जरूरी है। बढ़ती लागत और रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले कम होते जाने के कारण हमारे मार्जिन पर काफी दबाव पड़ रहा है।’