facebookmetapixel
Advertisement
स्काईरूट के रॉकेट विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष जाएगा ‘मिशन एम्ब्रेस’, कचरा हटाने वाली तकनीक का होगा सफल परीक्षणराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस का भाजपा-संघ पर बड़ा हमला, ट्रस्ट को भंग करने की मांग कीभारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता, $60 करोड़ में ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीदेगा जकार्ताकम गुणवत्ता वाले शेयरों का अत्यधिक मूल्यांकन है सबसे बड़ा जोखिम: विनय पहाड़ियाक्विक कॉमर्स में एमेजॉन और फ्लिपकार्ट की एंट्री से मचा हड़कंप, वितरकों ने FDI नियमों पर उठाए सवालबाजार में स्थिरता आते ही कंपनियों ने QIP से जुटाए ₹16,990 करोड़, अदाणी ग्रुप की डील से आई भारी तेजीकल्ट फिट ने आईपीओ के लिए सेबी के पास जमा किए पेपर, 950 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारीसन फार्मा ने ऑर्गनन का 11.75 अरब डॉलर में किया अधिग्रहण, SBI समेत 11 अलग-अलग बैंकों ने दिया कर्जकनेक्टेड कारों और EVs में हैकिंग का खतरा बढ़ा, सरकार ने वाहन कंपनियों को दिया साइबर ऑडिट का निर्देश53 कंपनियों में प्री-लिस्टिंग लॉक-इन तीन महीने में होगी समाप्त, निवेशकों की रहेगी नजर 

अमेरिका में सुस्त पड़े एस्सार स्टील के कदम

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 11:20 PM IST

धन की किल्लत के चलते एस्सार स्टील की अमेरिकी विस्तार योजना फिलहाल ठप पड़ गई है।
दरअसल, 1.6 अरब डॉलर की लागत से मिनिसोटा में लगने वाले इस संयंत्र को अमेरिकी बैंकों ने धन उपलब्ध कराने से मना कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी कर्जदाताओं से 90 करोड़ डॉलर की राशि उगाहने में नाकाम रहने पर रुइया समूह की इस कंपनी ने अब कनाडा और यूरोप के बैंकों से संपर्क किया है।
मामले से जुड़े एक कार्यकारी के मुताबिक, ”कंपनी अब तक अमेरिकी बैंकों से मदद मांग रही थी, लेकिन अमेरिका की मौजूदा तरलता संकट के चलते बैंकों ने इस परियोजना के लिए धन उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद कंपनी कनाडा और यूरोप के बैंकों से संपर्क कर रही है। यह परियोजना 2011 तक शुरू होनी है, लिहाजा उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में धन का प्रबंध हो जाएगा।”
परियोजना के पहले चरण के तहत एस्सार स्टील मिनिसोटा (ईएसएमएल) 40 लाख टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता का संयंत्र स्थापित करने वाली है। इस पर करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत आने वाली है। परियोजना तय समय पर शुरू हो इसके लिए कंपनी अब तक अपने आंतरिक संसाधनों का ही इस्तेमाल कर रही है।
दरअसल कंपनी ने इस दिशा में अब से करीब 2 साल पहले ही कदम बढ़ा दिए थे। 2007 में इसने अमेरिका की मिनिसोटा स्टील का अधिग्रहण कर लिया और इसका नाम बदलकर एस्सार स्टील मिनिसोटा लिमिटेड कर दिया। कंपनी ने पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी भी ले ली है। परियोजना के विकास की खातिर कंपनी 8,000 एकड़ जमीन भी खरीद चुकी है।
ईएसएमएल के अध्यक्ष और सीईओ मधु वुप्पुलुरी ने बताया कि 2008 पूरा होते-होते कंपनी ने परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम जैसे परियोजना स्थल का सर्वेक्षण, मृदा जांच आदि पूरे हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल भर में कपंनी ने परियोजना से जुड़े करोड़ों डॉलर के ठेके आवंटित किए हैं। आधारभूत निर्माण के मोर्चे पर कंपनी ने पिछले एक साल में काफी तरक्की की है।
कंपनी के सीईओ के मुताबिक, इस बात की पूरी कोशिश की जा रही है कि परियोजना वर्ष 2011 में शुरू हो जाए। चूंकि ईएसएमएल में उत्पादित उत्पाद की खपत समूह की ही अन्य कंपनी एस्सार स्टील अलगोमा में होनी है, इसलिए ईएसएमएल इस बात से कतई चिंतित नहीं है कि बाजार की दशा क्या है!
कंपनी के एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, इसके चलते ईएसएमएल की इस परियोजना को बैंकों से कर्ज मिलने में दिक्कत नहीं होगी। परियोजना के पहले चरण में केवल आयरन पेलेट उत्पादित किया जाएगा, वहीं उत्पादन शुरू होने के 2 साल बाद दूसरे चरण में लौह स्लैब का उत्पादन हो जाएगा। कंपनी ने इसके लिए1.4 अरब टन का लौह अयस्क लीज पर लिया है।

Advertisement
First Published - April 6, 2009 | 12:07 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement