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ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी तगड़ी डोज!

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Last Updated- December 10, 2022 | 6:36 PM IST

घरेलू ऊर्जा उपकरण क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने 21 हजार करोड़ रुपये के सुपरक्रिटिकल ऊर्जा उपकरणों का ठेका मंगाने का निर्णय लिया है।
यही नहीं अन्य उपकरणों का 15 हजार करोड़ रुपये का ठेका बाद में मंगाए जाने की भी योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह ठेका अगले कुछ दिनों में जारी होने की उम्मीद है।
इस निविदा के लिए केवल घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां ही योग्य होंगी। सूत्रों के मुताबिक, यह शर्त इसलिए लगाई जा रही है ताकि सुपरक्रिटिकल ऊर्जा उपकरण निर्माता कंपनियों की क्षमता बढ़ाई जा सके।
मालूम हो कि इन उपकरणों के जरिए तुलनात्मक लिहाज से कम कोयले में अधिक बिजली तैयार होती है। देश की सबसे बड़ी ऊर्जा उत्पादक एनटीपीसी ने ऐसी 9 इकाइयों की मांग की है। वहीं 660 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों की मांग दामोदर घाटी निगम की ओर से की गई है।
अधिकारी ने बताया कि यह निविदा मुख्य उपकरणों (बॉयलर-टरबाइन-जेनरेटर) के लिए मंगाई जाएगी। इसके अलावा कोयला हैंडलिंग प्लांट, राख हैंडलिंग प्लांट जैसे अन्य उपकरणों के लिए 15 हजार करोड़ रुपये की निविदा अलग से मंगायी जाएगी। इस तरह, सरकार की योजना कुल 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निविदा मंगाए जाने की है।
जानकारों के मुताबिक, पहली बार इतनी बड़ी राशि के ठेके मंगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो 800 मेगावाट के सुपरक्रिटिकल इकाई का भी ठेका जारी किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ”हमलोग सरकार से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है यह अगले कुछ दिन में मिल जाएगी।”
इस निविदा के लिए योग्य कंपनियों में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लि. (भेल), लार्सन ऐंड टुब्रो और एमएचआई का संयुक्त उपक्रम, जेएसडब्ल्यू और तोशिबा का संयुक्त उपक्रम, भारत फोर्ज और एल्सटॉम का संयुक्त उपक्रम औश्र एंसल्डो और जीबी इंजिनयरिंग का संयुक्त उपक्रम शामिल हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ”ठेके को सबसे सस्ते बिजली उत्पादक और दूसरे और तीसरे सबसे सस्ते बिजली उत्पादकों में बांटने की योजना है।”
सरकार सुपरक्रिटिकल इकाइयों को बढ़ावा दे रही है। अल्ट्रामेगा ऊर्जा संयंत्रों (4,000 मेगावाट की क्षमता) के लिए तो इसे अनिवार्य बना दिया गया है। 12 वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) में प्रस्तावित 140 ताप इकाइयों (1 लाख मेगावाट की वृद्धि) में से आधे सुपरक्रिटिकल तकनीक से निर्मित होंगे।
इस बोली में चीनी कंपनियों को भाग लेने से रोकना काफी आसान होगा क्योंकि भारत में उनकी कोई मैन्यूफैक्चरिंग सुविधा नहीं है। वैसे भी भारतीय परिस्थितियों में चीनी उपकरणों की गुणवत्ता और क्षमता पर संदेह उठाए जाते रहे हैं। सीईसी की ताजा रिपोर्ट में चीन के उपकरणों को क्लिनचिट दिया गया है।

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First Published - March 2, 2009 | 2:39 PM IST

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