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…बंद पेट्रोल पंपों पर भी लगाई जुगत

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Last Updated- December 10, 2022 | 6:56 PM IST

निजी क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) में जुगलबंदी को लेकर पींगे बढ़ रही हैं।
मामला आरआईएल के बंद पड़े पेट्रोल पंपों का है, जिन्हें कंपनी एचपीसीएल को पट्टे पर देना चाहती है। दूसरी ओर, एचपीसीएल इस मामले में तकरीबन 5 मर्चेंट बैंकरों की सलाह ले रही है।
पिछले साल तेल की कीमतों में बेतहाशा तेजी के चलते रिलायंस को अपने 1,400 पेट्रोल पंप बंद करने पड़े थे। अब रिलायंस इस कोशिश में लगी है कि एचपीसीएल उसके बंद पड़े इन पेट्रोल पंपों का संचालन करे, ताकि उसके बेकार पड़े पंपों से उसे कुछ आमदनी हो सके।
पिछले साल कच्चे तेल की कीमतें 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जिससे देश में तेल के दामों में भी इजाफा हुआ था। सरकारी तेल कंपनियां रिलायंस की तुलना में 4 से 5 रुपये लीटर कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेच रही थीं।
नतीजतन, रिलायंस को अपने पेट्रोल पंप बंद ही करने पड़े। इन सरकारी कंपनियों को को तो सरकारी सहारा मिलता रहा, लेकिन तेल की बढ़ी हुई कीमतों के चलते रिलायंस और एस्सार जैसी निजी कंपनियों का किला नेस्तनाबूद हो गया। इस मामले से जुड़े एक सूत्र का कहना है, ‘अगर एचपीसीएल इन पंपों को चलाए तो घाटे की काफी हद तक भरपाई की जा सकती है।’
वहीं, इन दोनों कंपनियों ने इस मामले में अधिकृत तौर पर चुप्पी साधी हुई है। एक मोटे अनुमान के तौर पर आरआईएल ने पेट्रोल पंप स्थापित करने में तकरीबन 4,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था और इनके बंद होने से लगभग 50,000 लोग प्रभावित हुए।
बंद पड़े पेट्रोल पंपों को चालू करने के लिए आरआईएल इन्हें पट्टे पर देना चाहती है एचपीसीएल को
तेल की कीमतों में बेतहाशा तेजी के चलते रिलायंस को बंद करने पड़े थे अपने 1,400 पेट्रोल पंप

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First Published - March 5, 2009 | 1:10 PM IST

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