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पवन ऊर्जा कारोबार को बेचेगी डीएलएफ

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Last Updated- December 10, 2022 | 10:27 PM IST

मंदी के इस दौर में रियल एस्टेट कंपनियां की दिक्कतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। वे पैसे उगाहने के अलग-अलग रास्तों की तलाश कर रही हैं।
इसी कवायद के तहत देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लि. ने अपने पवन ऊर्जा कारोबार को बेचना का मन बना लिया है। कंपनी में मौजूद सूत्रों की मानें तो प्रबंधन ने इस कारोबार को बेचने का फैसला इसलिए किया है, ताकि उससे मिले पैसे को कंपनी के मुख्य कारोबार में लगाया जा सके।
कंपनी के पास इस वक्त 260 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी के प्रवर्तकों की एक अन्य कंपनी डीएलएफ एस्सेट लि. के अधिग्रहण का काम पूरा हो जाने बाद डीएलएफ अपने पवन ऊर्जा कारोबार को बेचने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
इस बारे में जब कंपनी के ग्रुप एक्जीक्यूटिव डाइरेक्टर, राजीव तलवार से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। इस कारोबार में कंपनी ने 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
हालांकि, सूत्रों की मानें तो काफी मोटे डिप्रीशिऐशन के दावे को ध्यान में रखते कंपनी अब इस कारोबार को 1,100 करोड़ रुपये में बेचने की योजना बना रही है। उनके मुताबिक असल में कंपनी के अधिकारियों ने कुछ प्राइवेट इक्विटी कारोबारियों से इस बारे में बात भी की थी, लेकिन कारोबारी के मूल्य पर आकर बातचीत टूट गई।
एक पवन ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए प्रति मेगावॉट पांच से छह करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होती है, जबकि थर्मल पावर प्लांट को बनाने के लिए प्रति मेगावॉट 4-4.25 करोड़ रुपये की ही निवेश चाहिए।
चूंकि कंपनी डिप्रीशिऐशन के दावों को मानने का अधिकार है, इसलिए मुनाफे में चल रही यह कंपनी मोटा-ताजा टैक्स बचा सकती है। कंपनी के एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने के शर्त पर बताया कि, ‘डीएलएफ इस वक्त पुनर्संरचना के दौर से गुजर रही है। इसी कवायद के तहत डीएलएफ एस्सेट लि. और दूसरे कारोबारों को अधिग्रहण किया जा रहा है।’
उनके मुताबिक कंपनी ऐसे कदमों को उठाने जारी रखेगी, जिससे उसके निवेशकों की कमाई में इजाफा जारी रहे। उस अधिकारी ने यह भी बताया कि, ‘पवन ऊर्जा, कंपनी का मुख्य कारोबार का हिस्सा नहीं है। साथ ही, मौजूदा दौर में इस कारोबार में और पैसा लगाना हमारे लिए मुमकिन नहीं हो पाएगा।’
अधिकारी ने यह तो नहीं बताया कि कंपनी इसे कितने में बेचने की सोच रही है, लेकिन इतना जरूर कहा कि, ‘इसकी कीमत इसकी संपत्तियों के आधार पर तय की जाएगी।’ कंपनी इस वक्त डीएलएफ एस्सेट के अधिग्रहण को पूरा करने में जुटी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा हालात को देखते हुए कंपनी को उम्मीद है कि वह इस हफ्ते में इस बाबत ऐलान कर सकती है।
बैंकरों और दूसरे पक्षों से अब बस सहमति हासिल करनी बाकी रह गई है। सूत्रों का कहना है कि, ‘फिलहाल, डीएलएफ एस्सेट लि. का मूल्यांकन कम हुआ है। इसलिए बैंकर और कानूनी विशेषज्ञ ऐसे तरीके की तलाश मे जुटे हुए हैं, जिसके तहत डीएलएफ के निवेशकों को कोई नुकसान नहीं झेलना पड़े।’

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First Published - March 31, 2009 | 11:09 PM IST

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