कच्चे माल और जिंसों की कीमतों में लगातर गि रावट तथा उत्पाद कर में चार फीसदी की कटौती के बावजूद भी एफएमसीजी कंपनियों को राहत नहीं मिल पा रही है।
आशंका यह है कि हिंदुस्तान यूनिलिवर, आईटीसी, ब्रिटानिया और गोदरेज जैसी कंपनियों के परिचालन मुनाफे पर आखिरी तिमाही में भी जबरदस्त दबाव रहेगा।
मंदी की वजह से आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी पड़ चुकी है। इस कारण कंज्यूर डयूरेबल्स उत्पादों और कपड़ों का बाजार तो पहले से ही ठंडा पड़ा हुआ है। लेकिन अब इसका असर एफएमसीजी उत्पादों पर भी पड़ने लगा है। दिसंबर में खत्म हुई तिमाही में साबुन और वाशिंग पॉउडरों का बाजार भी काफी हद सिकुड़ चुका है।
बॉस्टन कंसल्टिंग कंपनी में पार्टनर और निदेशक अभीक सिंघी का कहना है कि, ‘इसलिए अपनी बिक्री के स्तर को बरकरार रखने के लिए एफएमसीजी कंपनियों अब कम कीमत में ज्यादा उत्पाद देने और प्रोमोशनल ऑफरों की शुरुआत कर सकती हैं। अपनी बिक्री को बरकरार रखने के लिए कंपनियां अब अपनी कीमतों में भी कटौती कर सकती हैं। इस वजह से उनके मुनाफे पर इस तिमाही में काफी दवाब रहेगा।’
पिछले साल कंपनियों ने जो मुनाफा कमाया था, उसकी अहम वजह थी महंगाई की वजह से कीमतों में इजाफा। 2008 में ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में औसतन 10-15 फीसदी का इजाफा किया था। दूसरी तरफ, उनकी बिक्री में पांच से आठ फीसदी का ही इजाफा हुआ था।
एंजेल ब्रोकिंग के विश्लेषक आनंद शाह का कहना है कि, ‘एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे में तो थोड़ा सा ही इजाफा हुआ था, लेकिन उनकी कमाई काफी बढ़ गई थी। हालांकि, मंदी की वजह से अब अगले कुछ तिमाहियों तक उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है। साथ ही, कच्चे माल की कीमतों और खर्चो में कमी आने की वजह से अब कीमतों में इजाफे के लिए स्कोप भी कम ही बचा है।’
मिसाल के तौर पर पिछले 15 महीनों में हिंदुस्तान यूनीलिवर ने अपने सभी उत्पादों की कीमतों में 15-18 फीसदी तक इजाफा किया है। अब कंपनी के लिए कीमतों में इजाफा करना नामुमकिन हो चुका है। अब कंपनी ने अपने उत्पादों की कीमतों में कटौती करनी शुरू कर दी है।
साथ ही, उसने अहम उत्पादों के वजन में भी इजाफा करना शुरू कर दिया है। कंपनी ने ऐसा अपनी बिक्री में इजाफा करने के लिए किया है। दूसरी तरफ, जिन कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा नहीं किया था, उनके मुनाफा पर इसका काफी असर पड़ा है।
मिसाल के तौर पर कॉलगेट-पामोलिव ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कमाई में 14 फीसदी का इजाफा दर्ज किया, लेकिन एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च की मानें तो उसका मुनाफा इस दौरान 355 बेसिस प्वाइंट सिकुड़ गया।