केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की बिक्री से संबंधित सभी वाणिज्यिक फैसले लेने का अधिकार निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को देने पर विचार कर रही है। इससे निजीकरण के लिए मंजूरी में लगने वाला वक्त बच सकेगा।
इन अधिकारों में प्राथमिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) को अंतिम रूप दिया जाना, प्रस्ताव के लिए आवेदन (आरएफपी), शेयर खरीद समझौता (एसपीए) और कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ी सेवा शर्तें शामिल हैं। इसके तहत फैसले लेने संबंधी शक्तियां दीपम को दिए जाने के मसले पर विनिवेश पर बने सचिवों का मुख्य समूह (सीजीजी) सोमवार को विचार कर सकता है, जिसके प्रमुख कैबिनेट सचिव हैं।
इस योजना पर विचार केंद्र द्वारा सफलतापूर्वक एयर इंडिया की बिक्री टाटा संस को किए जाने के बाद की जा रही है। हालांकि, बिक्री से मिले अनुभव ने प्रक्रिया से छेड़छाड़ की है क्योंकि शीर्ष अफसरशाही समूह से कई प्रकार की मंजूरियों की जरूरत थी।
फिलहाल किसी पीएसयू के निजीकरण से संबंधित सभी वाणिज्यिक मामलों पर चर्चा अंतरमंत्रालयी समूह द्वारा किया जाता है जिसकी अध्यक्षता दीपम के सचिव और प्रशासनिक मंत्रालय के सचिव करते हैं। समूह द्वारा बिक्री समझौते पर शर्तों या कर्मचारियों को बनाए रखने तथा ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए शर्तों के संबंध में निर्णय लिए जाने के बाद प्रस्तावों को कैबिनेट सचिव की अगुआई वाले समूह के पास भेजा जाता है।
एक अधिकारी ने कहा, ‘मौजूदा प्रक्रिया में मंजूरियां लेने के लिए कई बार आगे पीछे जाना पड़ता है जिससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होती है।’ अधिकारी ने कहा कि यदि प्रक्रिया छोटी की जाती है तो दीपम इन सभी पहलुओं पर निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में होने वाले निजीकरण प्रस्तावों के लिए समयसीमा को घटाने में मदद मिलेगी क्योंकि सरकार गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति घटाने और रणनीतिक क्षेत्रों में पीएसयू की संख्या को सीमित करने पर विचार कर रही है।
चूंकि सरकार नीति आयोग द्वारा सुझाए गए और अधिक पीएसयू का निजीकरण करने पर विचार कर रही है ऐसे में मंजूरियों में लगने वाले समय में कटौती किया जाना सख्त समयसीमा में योजना को लागू करने के लिए अहम बात है। निजीकरण के इस अभियान को सरकार के आत्मनिर्भर भारत के लिए नई सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति के जरिये अंजाम दिया जा रहा है।
अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट सचिव की अगुआई वाले समूह को पीएसयू के निजीकरण के लिए मूल्य संबंधी मामलों पर निर्णय लेने के लिए दीपम को शक्ति दी जाए या नहीं पर निर्णय लेना बाकी है। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन और आरक्षित मूल्य तय करने संबंधी मसले को पूरी तरह से दीपम पर नहीं छोड़ा जा सकता है और इसके लिए सीजीडी की मंजूरी की आवश्यकता पड़ सकती है। इस संबंध में शीघ्र ही निर्णय लिया जाएगा।
निजीकरण की प्रक्रिया को संक्षिप्त करने और ताजे निजीकरण प्रस्तावों पर धीमी प्रगति को देखते हुए नीति आयोग ने पहले अपनी तरफ से निजीकरण के लिए उम्मीदवार की सिफारिश किए जाने के बाद सीधे आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति की मंजूरी लेने पर जोर दिया था ताकि इस बीच सीजीडी से मंजूरी लेने के एक चरण को समाप्त किया जा सके। उक्त अधिकारी ने कहा कि हालांकि, इस पर विचार किया जाना अभी बाकी है।