बीएस बातचीत
जिंस कीमतों में तेजी के बीच पिछले कुछ दिनों के दौरान बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल से भारत समेत सभी वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ी है। टाटा म्युचुअल फंड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख मूर्ति नागराजन ने पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में बताया कि अतिरिक्त नकदी खपाने के लिए आरबीआई द्वारा विभिन्न रीपो दर नीलामियों की घोषणाओं का बाजार पर असर दिखा है। पेश हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंश:
क्या बॉन्ड प्रतिफल में भारी तेजी से बाजार चकित हुए हैं?
जिंस कीमतें चढ़ी हैं और वैश्विक प्रतिफल भविष्य में ऊंची मुद्रास्फीति की उम्मीद में बढ़ा है। भारतीय सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 80,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी और अगले वित्त वर्ष के लिए 12.80 लाख करोड़ रुपये के उधारी कार्यक्रम की घोषणा की है। आरबीआई ने नीलामी से परहेज करने का निर्णय लिया है, क्योंकि वह मौजूदा प्रतिफल के साथ सहज नहीं है। चूंकि प्रमुख डीलर कर्ज से जुड़े हैं इसलिए वह शेयरों से छुटकारा पाने के लिए निचले स्तरों पर पत्रों को बेचते हैं। बैंकिंग व्यवस्था में नकदी पर्याप्त बनी रहेगी और बैंक फंड से संपनन हैं।
अगले कुछ महीनों में आरबीआई की ओर से क्या उपाय होने की संभावना है?
बाजार अतिरिक्त तरलता खपाने के लिए आरबीआई द्वारा रीपो दर नीलामियों की घोषणा की वजह से डरा हुआ है। यह अतिरिक्त नकदी समस्या विदेशी मुद्रा बाजारों में आरबीआई के हस्तक्षेप की वजह से है और केंद्रीय बैंक को ज्यादा ओएमओ से रोक रही है। हमें उममीद है कि आरबीआई बैंकों की बैलेंस शीट को सुरक्षित बनाए जाने के प्रयास में इस वित्त वर्ष के अंत में कई और ओएमओ करेगा। जब 10 वर्षीय प्रतिफल 6 प्रतिशत से नीचे था तो केंद्र सरकार द्वारा कई उधारी सामने आईं। मौजूदा प्रतिफल से बैंकों के लिए मार्क-टु-मार्केट नुकसान को बढ़ावा मिलेगा और वे सरकार के बड़े उधारी कार्यक्रम में सहायता करने की राह से अलग होंगे।
क्या आप मानते हैं कि आरबीआई जल्द ही मुख्य दरें बढ़ाएगा?
दर वृद्घि इस तरह के परिवेश में आरबीआई के लिए कठिन निर्णय होगा, क्योंकि उपभोक्ता कीमत मुद्रास्फीति (सीपीआई) अपने लक्षित दायरे में है। सरकार अर्थव्यवस्था के सुधार का पा्रयास कर रही है और उसने वित्त वर्ष 2022 के लिए बड़े उधारी कार्यक्रम का लक्ष्य रखा है। दर वृद्घि तभी हो सकती है जब हम लगातार आर्थिक वृद्घि देखें।
ताजा घटनाक्रम को देखते हुए आपकी क्या रणनीति रही है?
हम कम वृद्घि वाले परिवेश में बने हुए हैं और वैश्विक बाजार आसान तरलता की वजह से बुनियादी बातों के मुकाबले ज्यादा आगे चल रहे हैं। हमने पिछले दो महीनों से अपनी सभी योजनाओं में परिपक्वता घटाई है। निवेशकों को धैर्य रखने की जरूरत होगी और उम्मीद है कि अच्छी गुणवत्ता वाले डेट फंडों में उन्हें प्रतिफल मिलेगा।
क्या डेट फंड चिंताओं से उबर चुके हैं?
बड़े खिलाड़ी और ज्यादा मजबूत हो रहे हैं और उन छोटी और कमजोर कंपनियों की वजह से मदद मिल रही है, जो बाजार भागीदारी गंवा रही हैं। मजबूत कंपनियों की साख गुणवत्ता मज बूत रहने की संभावना है, लेकिन कमजोर कंपनियों के लिए चुनौतियां बनी रहेंगी।
बाजार में ऊंची मुद्रास्फीति का कितना असर दिख रहा है?
पिछले दो सप्ताहों में, बाजारों में ऊंची मुद्रास्फीति और बड़े राजकोषीय घाटे का काफी असर दिखा। वैश्विक रूप से, डेट बाजारों को केंद्रीय बैंकों से समर्थन मिला है। भारतीय संदर्भ में, यह बेहद शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है, जिससे बॉन्ड बाजारों में अस्थिरता पैदा हो रही है।
अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल ऐसे समय में बढ़ रहा है जब मुद्रास्फीति जोखिम है। क्या वैश्विक केंद्रीय बैंकों से और ज्यादा समन्वित कदम उठाए जाने की संभावना देख रहे हैं?
वैश्विक स्तर पर कई केंद्रीय बैंकों ने अर्थव्यवस्था की गति मजबूत बनाने के लिए विदेशी मुद्रा और बॉन्ड बाजार में हस्तक्षेप किया है। जिंस कीमतें चढ़ रही हैं और इसकी वजह काफी हदद तक डॉलर में कमजोरी है।