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मंदी में भी जारी है कंपनी की आक्रामक नीति

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Last Updated- December 10, 2022 | 11:16 PM IST

आर्थिक मंदी के चलते इस समय जहां कई ऐड एजेंसियां अपनी रणनीति नए सिरे से बना रही हैं, वहीं जेडब्ल्यूटी इस साल डिजिटल और रिटेल मार्केटिंग क्षेत्र की कंपनियों का अधिग्रहण करने की सोच रही है।
‘गोवा ऐड फेस्ट’ में पहली बार आए जेडब्ल्यूटी वर्ल्डवाइड के अध्यक्ष माइकल मैडल से सुवि डोगरा और सपना अग्रवाल ने बात की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश :
मंदी के चलते जेडब्ल्यूटी की विकास और प्रसार नीति में कितना बदलाव हुआ है?
मंदी जहां पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही है, वहीं विकासशील देश अब भी तरक्की के रास्ते पर बढ़ रहे हैं। ऐसे में विकासशील देशों की भूमिका काफी बढ़ गई है। हम इस समय दो क्षेत्रों डिजिटल मार्केटिंग और रिटेल मार्केटिंग पर ध्यान दे रहे हैं। भारत, चीन, ब्राजील और रूस हमारी प्राथमिकताओं में हैं। एक्टिवेशन, डिजिटल और न्यू मीडिया सबको सही तरीके से संचालित करने के लिए हम सहयोगियों की तलाश कर रहे हैं।
जेडब्ल्यूटी के लिहाज से आने वाले सालों में भारत की भूमिका कितनी बदलेगी?
जेडब्ल्यूटी के लिए अमेरिका और ब्रिटेन के बाद भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। दूसरे देशों को अगले 12 से 18 महीने तक संघर्ष करना पड़ सकता है। ऐसे में हमारे लिए भारत काफी उपयोगी साबित होगा। चीन की तुलना में भारत के पास ज्यादा मजबूत और पर्याप्त कुशल श्रम है। ऐसे में भारत निश्चित तौर पर भविष्य का पावरहाउस है।
मुझे पूरा विश्वास है कि अगले 3 साल में जेडब्ल्यूटी के कुल राजस्व का 50 फीसदी हिस्सा उभरते बाजार से आएगा। इसमें भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहेगी। भविष्य की दिशा तय करने में एक ओर जहां अमेरिका होगा, वहीं दूसरी छोर पर भारत और चीन होंगे।
विज्ञापनों में इस समय क्या बड़े परिवर्तन होने चाहिए?
निश्चित तौर पर पारंपरिक मीडिया की तुलना में अपारंपरिक मीडिया का योगदान बढ़ेगा। हालांकि यह उद्योग विशेष पर निर्भर करता है। अनुमान है कि पारंपरिक और गैर-पारंपरिक मीडिया का राजस्व अनुपात 60:40 रहेगा। विज्ञापन बजट घटने के बावजूद इस समय हमारे क्लाइंट ज्याद प्रयोग करने के इच्छुक हैं। दरअसल जितना खर्च होगा, आमदनी उतनी ही अधिक होगी। इसलिए नया रास्ता तलाशना बड़ी चुनौती है।
एक साथ कई विशेष किस्म की सेवाएं उपलब्ध कराना, इस समय सूत्रवाक्य बन गया है। निश्चित तौर पर मंदी के बावजूद जितना संभव हो सके, उतनी किस्म की सेवाएं देना हमारा लक्ष्य है। अन्य प्रतियोगी की तुलना में हमने इस क्षेत्र में देर से प्रवेश किया। हम तेज और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। जैसा कि मैंने कहा कि हम डिजिटल और रिटेल मोर्चे पर ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं।
जेडब्ल्यूटी ने पहले ही चीन के रिटेल बाजार में निवेश कर रखा है। क्या भारत में भी इस तरह का कोई कार्यक्रम है?
चाहे सुपर मार्केट हो, स्टेडियम या शॉपिंग सेंटर चीन ने हमारी क्षमता बढ़ाने में हमेशा ही योगदान दिया है। क्लाइंटों की संख्या बढ़ाने में चीन का योगदान काबिले तारीफ है। भारत की बात करें तो यहां का रिटेल वातावरण लगातार आम किराए की दुकान से आधुनिक हो रहा है।

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First Published - April 4, 2009 | 5:57 PM IST

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