सरकार द्वारा अक्टूबर 2007 की कोयला नीति की समीक्षा के बाद कोयला उद्योग को इसकी खरीद बाजार निर्धारित कीमतों पर करना होगा।
इस बाबत कोल इंडिया लिमिटेड को अपने सभी संबद्ध हिस्सेदारों से ईंधन आपूर्ति समझौता (एफएसए) को संशोधित करना होगा।
योजना आयोग के सदस्य (ऊर्जा) किरीट एस. पारेख ने कहा कि उद्योग कोयले की खरीदारी काफी कम करते हैं, क्योंकि उसे कोल इंडिया लिमिटेड से सस्ती दरों पर कोयला उपलब्ध हो जाता है। उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में कोयले की कीमतों में काफी अंतर है।’
उन्होंने बताया कि उद्योगों को नियम के मुताबिक 5 करोड़ टन कोयला आयात करना चाहिए, लेकिन चूंकि इन्होंने कोल इंडिया से ईंधन आपूर्ति समझौता कर लिया है और इससे उन्हें सस्ती दरों पर कोयला मिल जाता है, इसलिए वे आयात नहीं करती है।