facebookmetapixel
Advertisement
टियर-2 शहर बने रियल एस्टेट का नया ग्रोथ इंजन, डेवलपर्स का बढ़ा निवेशभारत बनेगा GCC की ग्लोबल राजधानी! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रखा 2030 तक 5,000 सेंटर का लक्ष्यOil Shock से अब कम डरेगा भारत! 1991 के मुकाबले 30% ज्यादा एनर्जी एफिशिएंट हुई अर्थव्यवस्थाGoogle vs Hindware: कीवर्ड बिडिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा गूगल, सिंगल बेंच के फैसले को दी चुनौतीTCS Q1 Results: AI कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार, उम्मीद से बेहतर रहे नतीजे; मुनाफा 4.6% बढ़कर ₹13,349 करोड़ पहुंचाSME IPO होंगे सस्ते? सेबी ला रहा बड़ा सुधार, डीलिस्टिंग से लेकर लिस्टिंग लागत तक बदल सकते हैं नियमतेल की कीमतें तय करेंगी बाजार की चाल! कोटक एएमसी के एमडी नीलेश शाह बोले- रिटर्न की उम्मीदें रखें सीमितNSE Co-location Case: चित्रा रामकृष्ण को हाई कोर्ट से झटका, भ्रष्टाचार मामले में याचिका खारिजQ1 Preview: वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में अव्वल रहेंगी एनर्जी और टेलीकॉम कंपनियां ब्लूमबर्ग ने शुरू की भारत के सरकारी बॉन्ड की ई-ट्रेडिंग, FPI को मिलेगी बड़ी सुविधा

यूनिटेक को सस्ते की टेक

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 3:40 AM IST

मंदी की मार से बचने के लिए रियल्टी कंपनी यूनिटेक को भी अपनी योजनाएं बदलनी पड़ रही हैं।
महंगे अपार्टमेंट लेने वाले नजर नहीं आए, तो यह कंपनी भी सस्ते की राह ही चल पड़ी। नोएडा में 15,000 करोड़ रुपये की अपनी महंगी लक्जरी आवास परियोजना को कंपनी एकीकृत टाउनशिप के रूप में विकसित करेगी, ताकि बिक्री बढ़ाई जा सके।
कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि ‘यूनिटेक ग्रांड’ परियोजना में 300 अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ये अपार्टमेंट मूल योजना के अनुरूप ही बनाए जाएंगे। लेकिन खरीदार चाहें, तो अपार्टमेंट का स्वरूप बदलवा सकते हैं। इसी तरह कंपनी टाउनशिप में 51,000 रुपये प्रति वर्ग गज के भाव वाले भूखंड भी पेश कर रही है।
यूनिटेक ने जुलाई 2007 में नोएडा में 340 एकड़ में यूनिटेक ग्रांड परियोजना शुरू की थी। यूनिटेक ने यह परियोजना डीएलएफ को पछाड़कर 1,582 करोड़ रुपये में प्राप्त की थी।
कंपनी ने पहले अमीरों और अप्रवासी भारतीयों के लिए 5,300 फ्लैट वाली अति विलासितापूर्ण परियोजना घोषित की थी। लेकिन बदली परिस्थितियों में मंहगे मकान खरीदने वाले ग्राहक बाजार से गायब हो गए हैं और यह क्षेत्र अब मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में बिल्डरों को योजनाओं में बदलाव करना पड़ रहा है।

Advertisement
First Published - April 28, 2009 | 9:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement