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नकदी की कमी ने रिटेलरों को मार डाला…

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Last Updated- December 10, 2022 | 7:01 PM IST

धीमी पड़ चुकी बिक्री, बढ़ते कर्ज, अधिक किराये और धीमे विस्तार की वजह से शॉपर्स स्टॉप, लाइफ स्टाइल इंटरनेशनल, ट्रेंट, पैंटालून जैसी लाइफ स्टाइल रिटेलर कंपनी को कम से कम एक साल तक तरलता संकट से जूझना पड़ सकता है।
रेटिंग एजेंसी और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ये कंपनियां मौजूदा दौर में फायदे के लिए तरस रही है। शुक्रवार को रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने दुबई की लैंडमार्क ग्रुप की कंपनी लाइफ स्टाइल इंटरनेशनल की रेटिंग लगातार हो रहे घाटे और कर्ज से बचने के लिए अपनाए जा रहे कमजोर सुरक्षात्मक उपायों की वजह से कम कर दी है।
इसी तरह फिच रेटिंग ने रहेजा ग्रुप की कंपनी शॉपर्स स्टॉप की रेटिंग भी कम कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्टोरों में हो रही कम बिक्री और नए स्टोरों को खोलने में देरी की वजह से इन कंपनियों का घाटा बढ़ता जा रहा है।
रेटिंग कंपनी क्रिसिल के मुताबिक निजी रिटेल कंपनी लाइफ स्टाइल डिपार्टमेंटल स्टोर, जो होम सेंटर स्टोर और वैल्यू फॉर्मेट मैक्स स्टोर चलाती है, ने 2008-09 के शुरुआती नौ महीने में 46.5 करोड रुपये कर पूर्व घाटा दर्ज किया है।
क्रिसिल ने कहा है कि अधिक किराये और सर्विस टैक्स से प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ा है, साथ ही ज्यादा कर्मचारियों और ऊर्जा खपत की वजह से भी स्टोरों को काफी घाटा हो रहा है। यहां तक कि सूचीबद्ध रिटेलरों का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं है। पैंटालून रिटेल (पीआईएल) केलाभ में दिसंबर की तिमाही में 6 फीसदी का इजाफा हुआ, जो पिछले चार तिमाही के मुकाबले सबसे कम रहा।
शॉपर्स स्टॉप के डिपार्टमेंटल स्टोरों ने पिछले तीन तिमाही में 36.84 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। क्रि सिल रेटिंग के प्रमुख (कॉर्पोरेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर) अमोद खानोरकर ने कहा, ‘जितने भी लाइफ स्टाइल रिटेलर हैं, सबके मुनाफे पर असर पड़ा है। हालांकि कुछ बड़ी कंपनियों की स्थिति थोड़ी बहुत ठीक है। अब ज्यादतर रिटेलर बिक्री को लेकर नए स्टोरों पर निर्भर हैं। कुछ मामलों में मॉल में खुले हुए स्टोरों की बिक्री भी अच्छी नहीं रही है।’
विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेलर विस्तार और परिचालन के लिए भारी मात्रा में कर्ज भी ले रहे हैं। खानोरकर कहते हैं, ‘रिटेलर अपने खर्च को ग्राहकों से वसूल नहीं पाते हैं, क्योंकि उनका विस्तार कार्यक्रम धीमा पड़ गया है। अगर वे इन चीजों का आकलन पहले ठीक से कर लेते, तो मर्केंडाइजर से मोलभाव करने में आसानी होती।’

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First Published - March 5, 2009 | 3:21 PM IST

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