facebookmetapixel
Advertisement
चंद्रशेखरन के बाद टीसीएस के सामने नेतृत्व की नई चुनौती, टाटा समूह के साथ तालमेल पर भी नजरउदारीकरण के 35 साल: ‘एशिया के डेट्रॉइट’ से चेन्नई ने कैसे तय किया दुनिया के ऑटो हब तक का सफरअटकी चंद्रशेखरन के वारिस की तलाश, उत्तराधिकारी चुनने वाली चयन समिति गठित करने में लगेगा वक्त; AGM पर भी संशयभारत के एयर मोबिलिटी बाजार में उतरने की तैयारी, 2029 से ईवीटीओएल उड़ाने की स्काईड्राइव की योजनाMMDR विधेयक पर कुछ राज्यों को एतराज, खनन मंत्री बोले- प्रमुख खनिजों तक सीमित रहेंगे प्रावधानएयरटेल के ग्राहकों को महंगे प्लान में शिफ्ट करने से Vi को मिल सकता है मौका, बढ़ेगी कमाईस्मॉलकैप-मिडकैप फंड्स में फिर बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी, हर 3 इक्विटी फोलियो में 1 इनकाआरबीआई के नए नियमों से कर्ज दरों में बदलाव होगा तेज, बैंकों के स्प्रेड पर भी पड़ेगा असरQ1 Results: ABREL का घाटा बढ़ा, IGL का मुनाफा 44% घटा; LG Electronics का लाभ 27% बढ़ाभारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, नीति आयोग ने औद्योगिक पार्क और क्लस्टर का दिया सुझाव

मामले वापस लेने के लिए तैयार केयर्न

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 1:16 AM IST

c ने आज कहा कि वह भारत सरकार द्वारा पिछली तिथि से कराधान को निरस्त करने और मामले के समाधान के प्रावधान को स्वीकार करती है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि 1.2 अरब डॉलर के मध्यस्थता आदेश को लागू कराने के लिए भारत सरकार के खिलाफ दायर सभी मुकदमों को वापस लेने के लिए तैयार है। 
केयर्न एनर्जी की पूर्व सहायक इकाई केयर्न इंडिया का 2011 में अधिग्रहण करने वाली वेदांत भी मध्यस्थता मामले को वापस ले सकती है। वेदांत ने सिंगाुपर में भारत सरकार से करीब 5,000 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति के लिए मामला दायर किया था।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्घ केयर्न एनर्जी भारत सरकार के साथ सांविधिक करार कर सकती है, जिसके तहत 2014 से कर विभाग द्वारा कंपनी से पिछली तिथि से कराधान मद में वसूली गई राशि और जब्त संपत्तियों का रिफंड प्राप्त कर सकती है। सरकार के खिलाफ सभी मामले वापस लेने के बाद कंपनी को कुल 7,900 करोड़ रुपये का रिफंड मिल सकता है। 

कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के नियमों के मसौदा, जिसे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने पिछले हफ्ते जारी किया था, के अनुसार कंपनी को वसूली प्रक्रिया बंद करने और किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का हलफनामा देना होगा। इसमें अपीली फोरम, मध्यस्थता, अदालत आदि में चल रहे मामले या कोई पारित आदेश आदि शामिल हैं। मसौदे में संबंधित पक्षों और शेयरधारकों को भी मामले वापस लेने का समर्थन करना होगा।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘वेदांत ने भी नए कानून में रुचि दिखाई है और सिंगापुर पंचाट में उसके द्वारा दायर मामले को वापस लिए जाने की उम्मीद है।’ उक्त अधिकारी ने कहा कि वेदांत का मामला भी केयर्न एनर्जी से ही जुड़ा हुआ है। इसलिए सभी को इस तरह के मामले वापस लेने की जरूरत होगी।

Advertisement
First Published - September 7, 2021 | 11:44 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement