facebookmetapixel
Advertisement
भारत की नजर अब Qatar और Bahrain पर, GCC से पहले इन देशों के साथ होगी व्यापारिक साझेदारी!3 जुलाई को होगा बड़ा फैसला! 2030 तक 2 लाख करोड़ डॉलर निर्यात लक्ष्य पर सरकार का मेगा प्लानGold, Silver Price Today: तेज शुरुआत के बाद सोना पड़ा सुस्त, चांदी में भी गिरावटFCNR-B Scheme बनेगी विदेशी पूंजी का बड़ा जरिया? Standard Chartered CEO ने किया बड़ा दावामेडिकल डिवाइस कंपनियों को बड़ी राहत! लाइसेंस मिलने में लगेगा कम समय, सरकार लाई नया प्रस्तावअमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया संकट के बीच तिरुपुर ने बनाया रिकॉर्ड, ₹46000 करोड़ का निर्यातMeta का भारत पर बड़ा दांव, Jamnagar में Data Center से AI क्रांति की तैयारीGIFT City से दुनिया जीतने की तैयारी में भारतीय Fintech कंपनियां, सीमा पार पेमेंट कारोबार में खुलेंगे नए रास्तेStock Market Update: शेयर बाजार में हल्की तेजी! Sensex 100 अंक चढ़ा, Nifty 24,100 के करीब; Adani Enterprises-IndiGo बने सबसे बड़े लूजरपेट्रोल बाइक्स को मिल रही चुनौती, Electric Two-Wheeler की बिक्री ने पहली बार पार किया 10% आंकड़ा

मामले वापस लेने के लिए तैयार केयर्न

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 1:16 AM IST

c ने आज कहा कि वह भारत सरकार द्वारा पिछली तिथि से कराधान को निरस्त करने और मामले के समाधान के प्रावधान को स्वीकार करती है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि 1.2 अरब डॉलर के मध्यस्थता आदेश को लागू कराने के लिए भारत सरकार के खिलाफ दायर सभी मुकदमों को वापस लेने के लिए तैयार है। 
केयर्न एनर्जी की पूर्व सहायक इकाई केयर्न इंडिया का 2011 में अधिग्रहण करने वाली वेदांत भी मध्यस्थता मामले को वापस ले सकती है। वेदांत ने सिंगाुपर में भारत सरकार से करीब 5,000 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति के लिए मामला दायर किया था।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्घ केयर्न एनर्जी भारत सरकार के साथ सांविधिक करार कर सकती है, जिसके तहत 2014 से कर विभाग द्वारा कंपनी से पिछली तिथि से कराधान मद में वसूली गई राशि और जब्त संपत्तियों का रिफंड प्राप्त कर सकती है। सरकार के खिलाफ सभी मामले वापस लेने के बाद कंपनी को कुल 7,900 करोड़ रुपये का रिफंड मिल सकता है। 

कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के नियमों के मसौदा, जिसे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने पिछले हफ्ते जारी किया था, के अनुसार कंपनी को वसूली प्रक्रिया बंद करने और किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का हलफनामा देना होगा। इसमें अपीली फोरम, मध्यस्थता, अदालत आदि में चल रहे मामले या कोई पारित आदेश आदि शामिल हैं। मसौदे में संबंधित पक्षों और शेयरधारकों को भी मामले वापस लेने का समर्थन करना होगा।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘वेदांत ने भी नए कानून में रुचि दिखाई है और सिंगापुर पंचाट में उसके द्वारा दायर मामले को वापस लिए जाने की उम्मीद है।’ उक्त अधिकारी ने कहा कि वेदांत का मामला भी केयर्न एनर्जी से ही जुड़ा हुआ है। इसलिए सभी को इस तरह के मामले वापस लेने की जरूरत होगी।

Advertisement
First Published - September 7, 2021 | 11:44 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement