मंदी की वजह से जहां पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं लक्जरी बस पर्यटन सेवा पर इसका खास असर नहीं पड़ा है।
यही वजह है कि ट्रैवल कंपनियां लक्जरी कोच की बुकिंग को बढ़ावा दे रही हैं, वहीं वे इस क्षेत्र में अपना विस्तार भी कर रही हैं। जानकारों का कहना है कि पिछले 6 माह के दौरान टिकटकरन, कस्टमरनिड्स और ट्रैवलयारी जैसे ऑनलाइन बस पोर्टलों के कारोबार में इजाफा हुआ है, वहीं मेकमाईट्रिप, यात्रा और ईजीगो 1 भी बसों के टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग की शुरुआत कर दी है।
सूत्रों का कहना है कि क्लियरट्रिप भी इस दौड़ में शामिल होने की तैयारी कर रही है। देश में निजी बस सेवा और इंटरसिटी बस सेवा का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्रों में आता है। इससे बसों की बुकिंग का सही आंकड़ा पता लगाना मुश्किल होता है।
हालांकि रेडबस, मेकमाईट्रिप और बस बुकिंग एजेंटों के मुताबिक, लक्जरी बस बुकिंग में पिछले साल की तुलना में इस साल करीब 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि देश में करीब 2000 संगठित निजी बस ऑपरेटर हैं, जो करीब 20,000 लक्जरी बसों का परिचालन करते हैं।
ऐसे में प्रति सीट 500 रुपये की दर से और प्रति बस की बुकिंग 75 फीसदी के लिहाज से इस क्षेत्र का सालाना कारोबार करीब 12,000 करोड़ रुपये का है। पश्चिम भारत की कंपनी मेंटिस, जो बसों की बुकिंग के लिए इंटरनेट रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म मुहैया कराती है, उसने इस क्षेत्र में आक्रामक विस्तार की योजना बनाई है।
मेंटिस के अरविंद लामा का कहना है कि कंपनी अभी ऑनलाइन बस ऑपरेटरों के खाली सीटों की बुकिंग करती है। साथ ही इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मेकमाईट्रिप, ईजीगो 1 और ट्रैवलयारी भी कर रहे हैं। कंपनी अपने कारोबार के विस्तार के तहत 20 नए बस ऑपरेटरों को अपने साथ जोड़ने की योजना बना रही है।
फिलहाल कंपनी के पास 40 बस ऑपरेटर उपलब्ध हैं। कंपनी के पास प्रतिदिन 25,000 सीटों की बुकिंग उपलब्ध है। मेंटिस के एक अधिकारी का कहना है कि कंपनी ऐसा प्लेटफॉर्म की तैयारी कर रही है, जिससे यात्री को हर रूट के लिए सेवा उपलब्ध कराई जा सके।
ऑनलाइन बस बुकिंग की सबसे बड़ी कंपनी रेडबस का कहना है कि 2008-09 में कंपनी की आय पिछले साल के मुकाबले छह गुना बढ़ सकता है।रेडबस के सीईओ फणिंद्र सामा का कहना है कि भारत में लक्जरी बस सेवा के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
मौजूदा समय में देश में प्रति 1000 लोगों पर केवल 2 बसें उपलब्ध हैं। लक्जरी बसों की मांग को देखते हुए इसकी बिक्री भी बढ़ने के आसार हैं, जिसे वाहन निर्माता कंपनियों को भी फायदा होता नजर आ रहा है। लक्जरी बस निर्माता कंपनी वोल्वो के अधिकारी का कहना है कि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार से करीब 150 बसों का ऑर्डर मिला है।