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बेखटक जारी है बोइंग की उड़ान

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Last Updated- December 10, 2022 | 10:27 PM IST

विमान निर्माता कंपनी, बोइंग के मुताबिक वैश्विक मंदी की वजह से किसी भी भारतीय विमानन कंपनी ने उसे दिए ऑर्डर को रद्द नहीं किया है।
इस अमेरिकी कंपनी के अनुसार वह अगले पांच सालों में भारत में 17 अरब डॉलर मूल्य के अपने 100 विमानों को मुहैया करवा देगी। कंपनी ने पहले कहा था कि भारत में अगले 20 सालों में कम से कम 105 अरब डॉलर के विमानों की जरूरत होगी।
बोइंग इंडिया के अध्यक्ष दिनेश केशकर ने बेंगलुरु में कंपनी के शोध और तकनीक केंद्र के लॉन्च के मौके पर बताया कि, ‘हमने भारतीय विमानन कंपनियों से पैदा होने वाली मांग के बारे में जो भी अनुमान लगाया था, वह मंदी के बावजूद भी सही साबित हो रहा है। हम भारत में अपने पैर को पसारना चाहते हैं।’
उन्होंने बताया कि किसी भी भारतीय एयरलाइंस कंपनी ने कंपनी को दिए अपने ऑर्डर को रद्द नहीं किया है। पिछले साल जेट एयरवेज ने दो विमानों के ऑर्डर को टाल दिया था। नागरिक विमानों के साथ-साथ अब कंपनी भारत में प्रतिरक्षा सेक्टर से भी मोटे ऑर्डर को हासिल करने को बेताब है।
इसी के तहत वह रक्षा मंत्रालय के 126 मल्टी रोल लड़ाकू विमानों के ठेके को हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। इसके लिए कंपनी मंत्रालय के सामने बोली लगाने की प्रक्रिया में शामिल होने का आवेदन भी दे चुकी है।
बोइंग ने बेंगलुरु में जो शोध और तकनीक केंद्र खोला है, वह अमेरिका के बाहर किसी मुल्क में मौजूद कंपनी का तीसरा ऐसा केंद्र है। भारत के अलावा, कंपनी के यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में ऐसे केंद्र हैं। कंपनी का कहना है कि यह केंद्र अन्य शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों और दूसरी कंपनियों के साथ काफी करीब से जुड़कर काम करेगा, ताकि बोइंग की तकनीक को उच्च स्तरीय रखा जा सके।
बोइंग के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर और वरिष्ठ उपाध्यक्ष (इंजीनियरिंग, ऑपरेशंस और टेक्नोलॉजी) जॉन ट्रेसी का कहना है कि, ‘हमारी कंपनी इस वक्त दुनिया के बेहतरीन शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम कर रही है। यही लोग हमारे ग्राहकों की तकनीकी जरूरतों को पूरा करते हैं। हमें भारत में मौजूद अपने सहयोगियों से काफी उम्मीदें हैं क्योंकि उनके पास कुछ सबसे अच्छी तकनीकें हैं।’
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि इस केंद्र में शोधकर्ता एयरो-स्ट्रक्चर, एयरोडाइनेमिक्स और इलेक्ट्रोनिक नेटवर्क से जुड़ी बातों में नई सोच को विकसित करने में मदद करेंगे। इस केंद्र में 30 शोधकर्ता और वैज्ञानिक काम करेंगे। ये लोग पूरे देश में मौजूद 1,500 शोधकर्ताओं के साथ मिलकर काम करेंगे। इसमें से 100 शोधकर्ता तो कंपनी की आने वाली परियोजनाओं पर काम करेंगे।
बोइंग पहले से ही एयरोस्पेस रिसर्च कंसोर्टियम के तहत इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस, विप्रो और एचसीएल के साथ मिलकर काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक यह भारत का पहला ऐसा सरकारी निजी एयरोस्पेस शोध समूह है, जो सिर्फ आने वाले कल के नेटवर्क तकनीकों और अवधारणाओं पर काम कर रहा है। 

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First Published - March 31, 2009 | 11:14 PM IST

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