संपत्ति प्रबंधन कंपनी भारती एक्सा इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स को पंजीकृत हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ कि इस संयुक्त उपक्रम की हिस्सेदार भारती इंटरप्राइजेज ने इससे तौबा करने का मन बना लिया है। इस बात की पूरी संभावना है।
हालांकि, जीवन बीमा और सामान्य बीमा कारोबार में ये दोनों साथ-साथ बनी रह सकती हैं। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, भारती या तो अपनी हिस्सेदारी कम कर लेगी या संयुक्त उपक्रम से बाहर हो जाएगी। इस बयान के बाद फंड कंपनी अपना वितरण नेटवर्क मजबूत करने के लिए किसी दूसरे बैंक का दामन थामने की फिराक में है।
भारती में कंपनी के एक अधिकारी ने बताया, ”इसमें कुछ भी विशेष नहीं है। यह उपक्रम दरअसल एक्सा ही चला रही थी। हमलोगों की तो इसमें मात्र 25 फीसदी हिस्सेदारी थी। इस उपक्रम में वित्तीय सहयोगी के तौर पर बने रहना ज्यादा बेहतर है। हमलोग या तो अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं या इससे पूरी तरह बाहर निकल जाएंगे।”
प्रवक्ता ने बताया, ”एक्सा के साथ एसेट मैनेजमेंट के इस संयुक्त उपक्रम में भारती की बहत थोड़ी हिस्सेदारी है। संयुक्त उपक्रम बैंकों से इस बाबत बात कर रहा है, ताकि वितरण क्षमता मजबूत की जा सके। इस वजह से भारती या तो संयुक्त उपक्रम में अपनी हिस्सेदारी कम कर लेगी या तो इससे बाहर हो जाएगी। हां, इस निर्णय से एक्सा के साथ चल रहे बीमा कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।’
उल्लेखनीय है कि म्युचुअल फंड उद्योग में भारती एक्सा सबसे छोटी कंपनियों में शुमार है। इसके पास एसेट मैनेजमेंट के तहत फरवरी अंत तक मात्र 186.77 करोड़ रुपये हैं। कंपनी के पास मात्र 6 स्कीम हैं, जिनमें से 3 तो हाइब्रिड हैं। वर्ष 2007-08 में कंपनी को 15.53 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
यदि यह गठजोड़ टूटता है तो पिछले कुछ महीनों में यह दूसरा म्युचुअल फंड पार्टनरशिप होगा जो टूटेगा। मालूम हो कि रेलीगेयर और एजॉन ने भी म्युचुअल फंड कारोबार में एक-दूसरे का साथ छोड़ दिया। हालांकि ये दोनों अब भी जीवन बीमा कारोबार में साथ-साथ हैं।
उधर बैंक ऑफ इंडिया जैसा बैंक म्युचुअल फंड कारोबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए गठजोड़ की फिराक में है। ऐसे में भारती एक्सा में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बैंक ऑफ इंडिया सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।