मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने समूह की कंपनी रिलायंस पेट्रोलियम को अपने में मिलाने के प्रस्ताव की घोषणा की है।
दोनों कंपनियों ने बीएसई को दी सूचना में बताया कि कंपनी का बोर्ड सोमवार यानी 2 मार्च को इस मुद्दे पर विचार करेगा। यदि इन दोनों कंपनियों का विलय हो जाता है तो संयुक्त कंपनी 2.33 लाख करोड़ रुपये की कंपनी हो जाएगी। फिलहाल आरआईएल का बाजार पूंजीकरण 1.99 लाख करोड़ रुपये का है।
दिसंबर 2008 तक प्रवर्तकों के पास आरआईएल के 49 फीसदी शेयर हैं, वहीं आरपीएल में उनके 70.38 फीसदी शेयर हैं। अमेरिकी कंपनी शेवरन जिसकी आरपीएल में 5 फीसदी हिस्सेदारी है, को प्रस्ताव है कि वह जुलाई 2009 तक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 24 फीसदी कर ले।
जानकारों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा होने की संभावना कम है और उम्मीद है कि वह कंपनी से बाहर हो जाएगी। जानकारों की मानें तो इस विलय से आरपीएल के शेयरधारकों को लंबे समय में फायदा मिलेगा।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा की इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया रही कि इसे लेकर कोई कानूनी समस्या नहीं है। कंपनी के सूत्रों के मुताबिक, यह विलय मुख्यत: आरआईएल की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
उसके मुताबिक, इस विलय से आरआईएल दुनिया के 50 सबसे अधिक मुनाफेवाली कंपनी बन जाएगी। वहीं यह 10 निजी रिफाइनरी कंपनियों में शामिल हो जाएगी। यह प्रोपीलिन की पांचवी सबसे बड़ी उत्पादक भी हो जाएगी।
आरआईएल की क्षमता बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है विलय का कदम
शेयरधारकों को भी होगा लंबे समय में मोटा फायदा, बैठक 2 मार्च को