सत्यम घोटाला किस तरह अंजाम दिया गया, यह जानने की उत्सुकता हर किसी को है।
इंडियन इंस्टीटयूट आफ चार्टर्ड एकाउंटेंट (आईसीएआई) के अध्यक्ष उत्तम प्रकाश अग्रवाल के मुताबिक, कंपनी के पूर्व सीएफओ वाडलामणि श्रीनिवास ने पूछताछ में इसका सिलसिलेवार खुलासा किया।
इस घोटाले की जांच कर रही आईसीएआई की समिति के सदस्य अग्रवाल और शांतिलाल डागा ने श्रीनिवास और बर्खास्त ऑडिटरों एस.गोपालकृष्णन और तालुरी श्रीनिवास से रविवार को हैदराबाद स्थित केंद्रीय जेल में पूछताछ की थी।
आइए देखते हैं,बकौल श्रीनिवास क्या है सत्यम के असत्यम में बदलने की यह दुखद मगर दिलचस्प कहानी :
घर जला घर के चिराग से !
घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बी. रामलिंग राजू उनके छोटे भाई और कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक बी. राम राजू हैं।
बरसों पहले पड़े थे बीज
घोटाला पांच-छह साल पहले 10 करोड़ रुपये के समायोजन के साथ शुरू हुआ और तिमाही दर तिमाही यह चलता रहा। कई सालों तक चालू खाते में रुपये को रखा गया।
जालसाजी पर टिका था जलवा
कंपनी के पास 600 ग्राहक थे। उनमें से कुछ की बिक्री रसीद को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।
उसके बाद उन्होंने 90 दिन के भीतर प्राप्त रुपये को (फर्जी) बैंक स्टेटमेंट्स में दिखाया।
सभी तथ्य और वाह्य स्टेटमेंट्स ऑडिटर्स को सत्यम प्रबंधन ने उपलब्ध कराए थे।
वर्ष 2006 में दो विशेषज्ञों ने उनसे यह पूछा था कि जब इतनी नकदी है तो वह कोष जुटाना क्यों चाहते हैं। तब रामलिंग राजू ने एफडीआर रसीद के जरिए धन को बैंक खातों की बजाए अचल संपत्ति के रूप में दिखाया।