मंद पड़ी आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की खातिर सरकार ने मंगलवार को सेवाकर में 2 फीसदी की कटौती की घोषणा की।
सरकार ने यह कदम देश के सकल घरेलू उत्पाद में 60 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले सेवा क्षेत्र में विश्वास बहाली के लिए उठाया है। इस कदम को समान वस्तु और सेवा कर (यूजीएसटी) की दिशा में कदम माना जा रहा है।
केपीएमजी में अप्रत्यक्ष कर के कार्यकारी निदेशक प्रतीक जैन के मुताबिक, ”मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ऐसे कदम की जरूरत थी। उत्पाद सस्ते होंगे, जिससे मांग बढ़ेगी विशेषकर मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में।”
अर्नस्ट ऐंड यंग के विवेक मिश्रा ने बताया, ”पिछले एक साल में कर में 8 फीसदी की कमी हुई है। उम्मीद है कि इस कदम से कीमतें 9 फीसदी कम होंगी। दूरसंचार, केबल टीवी, रियल सेक्टर और रिटेल क्षेत्र को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।”
अप्रत्यक्ष कर के विशेषज्ञ और अधिवक्ता शैलेश सेठ के शब्दों में, ”सेवा कर राजस्व कुल राजस्व संग्रह का करीब 12 फीसदी है। हालांकि इस कदम का मौजूदा वित्त वर्ष के परिणाम पर असर नहीं होगा क्योंकि अब यह एक माह ही बचा है। इसका एक और मतलब है कि अगला साल काफी मुश्किल होने वाला है।”
एंजिल ब्रोकिंग के अनुसंधान प्रमुख हितेश अग्रवाल की राय में, ”जीडीपी में 80 फीसदी की संयुक्त हिस्सेदारी रखने वाले मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र को इससे राहत मिलेगी। हालांकि मांग बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में इन कदमों का बहुत ज्यादा योगदान नहीं होने वाला।”
दूरसंचार, केबल टीवी, रियल सेक्टर और रिटेल क्षेत्र को फायदा मिलने की उम्मीद