विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) को मंजूरी देने वाले बोर्ड ने अडानी समूह के तीन अलग-अलग सेज को मिलाकर एक सेज बनाने की अनुमति दे दी है।
यह सेज गुजरात के मुंद्रा में होगा, जिसका क्षेत्रफल 6,100 हेक्टेयर होगा। इस तरह सेज को दी गई 5,000 हेक्टेयर की सीमा भी पहली बार लांघी जा रही है।
ये तीनों सेज एक दूसरे के आसपास स्थित हैं, जिनमें दो बहु उत्पाद सेज है और तीसरा बिजली पर आधारित सेज है। मौजूदा सरकार के तहत मंजूरी बोर्ड की आज आखिरी बैठक थी और उसमें इसे हरी झंडी दे दी गई।
बोर्ड की अगली बैठक नई सरकार की छत्रछाया में जून में होगी। लेकिन आखिरी बैठक में उसने 9 नए सेज को मंजूदी दे दी, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी के निकट सहयोगी आनंद जैन की कंपनी का सेज भी शामिल है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘मिलाजुलाकर जो सेज बनाया जा रहा है, उसका विकास करने के लिए 5 कंपनियां हाथ मिलाएंगी। इसमें 1,00,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश होने की संभावना है और अगले 10 साल के दौरान 5 लाख लोगों को रोजगार भी इस सेज से मिलेगा।’
तीनों सेज के लिए अधिसूचना अलग-अलग जारी की गई थी क्योंकि विकास करने वाली कंपनियों ने जमीन भी अलग-अलग समय पर ही खरीदी थी।
इसके अलावा दोनों बहु उत्पाद सेज के बीच से एक सड़क भी गुजरती है, जिसकी वजह से इनको जोड़ने में दिक्कत आ रही थी। अडानी समूह ने कहा कि इन सेज का परिचालन कम लागत में बेहतर तरीके से हो जाएगा, इसलिए इन्हें मिलाकर एक सेज बना लेना चाहिए।
बिजली आधारित सेज से 2,300 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगा। इससे जुड़े एक अधिकारी का कहना है, ‘इसकी पहली इकाई अगले महीने काम करना शुरू कर देगी जिससे 300 मेगावाट बिजली पैदा होगी।’
इन सेज को 5,000 हेक्टेयर की तय सीमा में छूट देन का फैसला पिछले साल अक्टूबर में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाले अधिकारप्राप्त मंत्रियों के समूह ने किया था। जबकि इससे पहले इसी मंत्री समूह ने अप्रैल 2007 में किसी भी सेज के लिए अधिकतम 5,000 हेक्टेयर जमीन की सीमा तय की थी।
दरअसल, सेज के लिए जमीन अधिग्रहण में बढ़ते असंतोष के चलते यह कदम उठाया गया था। इस तरह के मामलों में कई जगहों पर सरकार के लिए अप्रिय स्थिति पैदा हो गई थी।
फरवरी 2006 में जब, सेज अधिनियम पारित किया गया था तब अधिकतर डेवलपर्स ने 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन वाले सेज की योजना बनाई थी लेकिन सरकार के इस फैसले के चलते इनमें से कई को अपनी योजनाओं पर ब्रेक लगाना पड़ा।
इस फैसले के अलावा बोर्ड ने एस्सार के स्टील सेज से उत्पादों के निर्यात को भी मंजूरी दे दी। इस बाबत एक अधिकारी का कहना है, ‘इस तरह की बातें सामने आ रही थीं कि इस सेज से कुछ उत्पाद पास के घरेलू बाजार में आ रहे थे, लेकिन इसकी जांच करने पर ऐसा कुछ नहीं पाया गया।’
नए सेज के लिए बोर्ड ने लांघी 5,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल की निर्धारित सीमा
अडानी समूह के हाथ में होगी भारत के इस सबसे बड़े सेज की कमान
5 कंपनियां मिलाएंगी इस सेज के विकास के लिए हाथ, 1,00,000 करोड़ रुपये का निवेश
इससे पहले सरकार ने लगा रखा था 5,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल से बड़े सेज पर ब्रेक