facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी जीवन बीमा की मांग मजबूत रहेगी, HDFC Life चेयरमैन केकी मिस्त्री का भरोसामुंबई पोर्ट का बड़ा इंफ्रा विस्तार, ₹3,541 करोड़ की परियोजनाओं से बढ़ेगी कार्गो और पर्यटन क्षमतापश्चिम एशिया संकट से बिजली उपकरण उद्योग पर बढ़ा लागत का दबाव, एल्युमीनियम-तांबे की कीमतों में तेज उछालसरकार की विनिवेश मुहिम तेज, Q1 में ही ₹18,000 करोड़ से ज्यादा जुटाए; पिछले वित्त वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ाFCNR(B) जमा पर 9x लीवरेज की पेशकश की तैयारी, NRI निवेशकों को मिल सकता है 12-18% रिटर्नकच्चे तेल में नरमी से बाजार को सहारा, सेंसेक्स-निफ्टी ने लगातार तीसरे सप्ताह दर्ज की बढ़तट्रेंट ने दोहराया 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य, वेस्टसाइड-जूडियो विस्तार और बेहतर LFL से तेजी की उम्मीदनिफ्टी IT इंडेक्स टूटने के बाद भी म्युचुअल फंड निवेशकों ने पैसिव स्कीम्स में लगाया करोड़ों का दांवभारतीय शेयर बाजार में जल्द लौट सकती है तेजी, ICICI Securities ने बताए सुधार के मजबूत संकेतकच्चे तेल में गिरावट और विदेशी निवेश से रुपया लगातार चौथे दिन मजबूत, बॉन्ड यील्ड भी फिसली

वायदा पर मतभेद दूर करने की कोशिश होगी आज

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 11:02 PM IST

वायदा कारोबार पर अभिजीत सेन समिति की बुधवार को एक बैठक होगी, जिसमें मसौदे की सिफारिशों पर उभरे मतभेदों को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।


सेन समिति के एक सदस्य शरद जोशी ने बताया ” मैं एक असहमति पत्र देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अध्यक्ष ने मसौदे को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए कल एक बैठक बुलाई है।” उन्होंने कहा ” अध्यक्ष महोदय सभी मतभेदों को दूर करने की कोशिश करेंगे और एक नया मसौदा उभर सकता है जिसमें उम्मीद है कि मामूली असहमति भी नहीं होगी।”


गौरतलब है कि केंद्र योजना आयोग के सदस्य अभिजीत सेन की अध्यक्षता में गठित समिति की रपट का इंतजार कर रही है और अगर सरकार को निर्धारित समय में रपट नहीं मिलती तो वह वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने या नहीं लगाने के संबंध में निर्णय ले सकता है। दूसरी ओर जोशी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि 27 अप्रैल तक सेन कमेटी की रिपोर्ट आने की संभावना है।


उन्होंने यह भी कहा कि सेन कमेटी पर वायदा कारोबार पर रोक  लगाने का पूरा दबाव है। और इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सरकार अपनी सहयोगी पार्टियों के दबाव में आकर वायदा कारोबार पर रोक लगा दे। जोशी ने कहा कि मसौदे की सिफारिशों में भारतीय जिंस बाजार को अंतरराष्ट्रीय रुख से अलग करने के मुद्दे पर विवाद का एक बिंदु है खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।


उन्होंने कहा ” मसौदे में दावा किया गया है कि गेहूं के वायदा कारोबार प्रतिबंध लगाए जाने से केंद्र सरकार गेहूं की घरेलू कीमतों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों से अलग रखने में सफल रही।


मसौदे में निकाला गया यह निष्कर्ष मुझे तार्किक नहीं लगता” जोशी ने कहा गेहूं के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी कीमतों पर नियंत्रण के लिए कई उपाय किए गए जिसमें ऊंची कीमतों पर गेहूं का आयात और भंडारण पर पुलिस की दबिश शामिल है। मसौदे के मुताबिक फरवरी 2007 से फरवरी 2008 के बीच गेहूं की कीमतें सौ फीसदी तक बढ़ गई है।

Advertisement
First Published - April 23, 2008 | 12:10 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement