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सस्ती हुई चीनी! हफ्तेभर में भाव 20% तक गिरे, सरकारी अनुमति का आधा ही हो पाएगा आयात

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देश में चीनी की कमी नहीं है। आने वाले दिनों में फुटकर बाजारों में कीमतें कम होने की उम्मीद है।

Last Updated- August 26, 2026 | 3:29 PM IST
Sugar Imports

Sugar Prices: चीनी की कीमतों पर काबू पाने लिए सरकार द्वारा उठाएं गए कदमों का परिणाम बाजार में दिखाई देने लगा है। बाजार में चीनी के दाम गिरना शुरु हो गए हैं। घरेलू चीनी की कीमतों में गिरावट के कारण भारतीय चीनी मिलों और रिफाइनरियों द्वारा सरकार की ओर से शुल्क-मुक्त आयात के लिए मंजूर 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी में से लगभग आधी मात्रा ही आयात किए जाने की संभावना है।

20 फीसदी सस्ती हुई चीनी

सरकार की सख्ती और चीनी आयात करने के फैसले के बाद घरेलू एक्स-मिल चीनी कीमतों में पिछले सप्ताह के रिकॉर्ड स्तर से करीब 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये प्रतिकिलो और खुदरा भाव 63.05 प्रति किलो बताया जा रहा है।

उससे पहले चीनी की खुदरा कीमतें औसतन 67 रुपये प्रतिकिलो के आसपास पहुंच गई थीं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि देश में चीनी की कमी नहीं है। आने वाले दिनों में फुटकर बाजारों में कीमतें कम होने की उम्मीद है।

चीनी आयात करना फायदे का सौदा नहीं

सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है जिसकी पूरी संभावना ब्राजील से आने की है। हालांकि ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में करीब 40 दिन का समय लग सकता है। MEIR Commodities India के प्रबंध निदेशक राहिल शेख ने कहा कि, जब घरेलू चीनी कीमतें मजबूत और लगातार बढ़ रही थीं, तब आयात व्यावसायिक रूप से आकर्षक दिखाई दे रहा था।

लेकिन सरकार की घोषणा के बाद कीमतों में तेज गिरावट से मिलों के लिए आयात की रुचि कम हो गई है। आयात पर मिलने वाला मार्जिन अब काफी कम हो गया है और यह भी अनिश्चित है कि करीब दो महीने बाद जब आयातित चीनी भारत पहुंचेगी, तब आयात लाभदायक रहेगा या नहीं।

Also Read: कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, WTI 80 डॉलर के करीब; आखिर क्यों टूटे भाव?

सरकार की अनुमति से आधा होगा आयात

राहिल शेख और वैश्विक व्यापारिक घरानों के चार अन्य डीलरों ने कहा कि आयात करीब 500,000 टन से अधिक होने की संभावना नहीं है। उनका मानना है कि मुनाफा कम होने और समय से पहले घरेलू मिलों में क्रशिंग शुरू होने से इंपोर्ट कम होगा।

चीनी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है , जमाखोरी की वजह से कीमतें बढ़ी थी लेकिन सरकार की सख्ती की वजह से स्टॉकिस्टों के ऊपर अपना माल निकालने का दबाव है, ऐसे में बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी । दूसरी तरफ भारतीय रिफाइनरियां आयात में ज्यादा दिलचस्पी भी नहीं दिखा रही है क्योंकि उनके पास पहले का स्टॉक पड़ा है।

रिफाइनरियों को घरेलू बाजार में चीनी बेचने की अनुमति

भारत में कुछ बंदरगाह-आधारित चीनी रिफाइनरियां कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात कर उसे रिफाइन करके सफेद चीनी बनाती हैं और उसका निर्यात करती हैं। सरकार के हालिया फैसले के तहत ये रिफाइनरियां आयात कोटे के लिए आवेदन कर सकती हैं और पहले से आयात की गई कच्ची चीनी से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को अक्टूबर के अंत तक घरेलू बाजार में बेच सकती हैं।

इन रिफाइनरियों के पास फिलहाल करीब 3 लाख टन चीनी का स्टॉक है, जिसे वे तेजी से घरेलू बाजार में बेच सकती हैं। हालांकि, चीनी मिलों ने आयात में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि अक्टूबर के मध्य से नया गन्ना पेराई सत्र शुरू होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू चीनी की आपूर्ति बढ़ेगी और स्थानीय कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।

15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का आग्रह

भारत सरकार ने चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा है। सरकार ने फिलहाल केवल कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके लिए चीनी मुख्य रूप से ब्राजील से आने की संभावना है। घरेलू बाजार में बिक्री से पहले इस कच्ची चीनी को रिफाइन करना जरूरी होगा।

मुंबई स्थित डीलर ने कहा कि यदि सरकार कच्ची चीनी के साथ-साथ सफेद चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की भी अनुमति देती, तो घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति और तेजी से बढ़ाई जा सकती थी।

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First Published - August 26, 2026 | 3:27 PM IST

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