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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रुपया गिरकर तीन हफ्ते के निचले स्तर पर

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रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोर होकर गुरुवार को 94 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। डीलरों के अनुसार स्थानीय मुद्रा 94.11 प्रति डॉलर पर बंद हुई

Last Updated- April 23, 2026 | 10:34 PM IST
Rupee vs Dollar

पश्चिम एशिया संकट को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोर होकर गुरुवार को 94 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। डीलरों के अनुसार स्थानीय मुद्रा 94.11 प्रति डॉलर पर बंद हुई, जो 30 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। इससे एक दिन पहले यह 93.80 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, डॉलर की हेजिंग से जुड़ी ज्यादा मांग और सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर व्यापक रुझान की वजह से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94 के स्तर से नीचे आ गया है। केंद्रीय बैंक का दखल भी इस गिरावट को रोक नहीं पाया क्योंकि कच्चे तेल और अमेरिकी डॉलर दोनों में एक साथ आई तेजी ने रुपये पर और ज्यादा दबाव डाला। अल्पावधि में रुपया बुलिश दिखता है और 93.80 प्रति डॉलर के आसपास इसे समर्थन मिल सकता है और 94.60 प्रति डॉलर पर प्रतिरोध देखना पड़ सकता है।

मौजूदा कैलेंडर वर्ष में घरेलू मुद्रा के मूल्य में अब तक 4.50 फीसदी तक की गिरावट आई है। हालांकि अप्रैल में अब तक इसमें 0.74 फीसदी की बढ़त भी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में गतिरोध के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए शांति प्रस्ताव पेश करने की कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं की है जबकि बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। दूसरी ओर, ईरान अपनी प्रमुख मांगों पर समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहा है, जिससे नई बातचीत की गुंजाइश सीमित हो गई है। स्थिति प्रभावी रूप से एक गतिरोध पर पहुंच गई है, जहां दोनों पक्षों की ओर से जारी तनाव और प्रतिबंधों के बीच होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान बना हुआ है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, आरबीआई द्वारा सर्कुलर वापस लेने के बाद से भारतीय रुपया लगातार गिर रहा है और यह 92.70 से 94.20 तक पहुंच गया है। सिर्फ 4 दिनों में इसे 1.50 रुपये का नुकसान हुआ है।

आर्बिट्राज का मौका सिर्फ कंपनियों और बैंकों के लिए उपलब्ध है और वह भी 10 करोड़ डॉलर की सीमा तक (यह अधिकतम ओवरनाइट पोजीशन है जिसकी अनुमति है)। तेल कंपनियां बाजार में नहीं हैं। हालांकि एसबीआई को तेल कंपनियों के लिए हाजिर बाजार के जरिये डॉलर खरीदते देखा गया था, फिर भी आरबीआई की तमाम कोशिशों के बावजूद डॉलर की खरीदारी रुकी नहीं हुई है।

डॉलर इंडेक्स 98.75 पर था जबकि एक दिन पहले यह 98.30 पर रहा था। यह छह प्रमुख मुद्राओं के बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है।

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First Published - April 23, 2026 | 10:09 PM IST

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