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सोने की बढ़ती चमक ने बदला ट्रेंड, हल्के वजन वाली डिजाइन ज्वेलरी बन रही खरीदारों की पसंद

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पुराना सोना के बदले ज्वेलरी ले रहे हैं, साथ ही भारी भरकम गहनों की जगह कम कैरेट के हल्के वजन वाले डिजाइन ज्वेलरी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं

Last Updated- August 24, 2026 | 3:40 PM IST
gold jewellery
प्रतीकात्मक फोटो

सोने की कीमत में तेजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोने की ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी बाजार का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। लोग नया सोना खरीदने के बजाय अपने घरों में रखे पुराना सोना के बदले ज्वेलरी ले रहे हैं। साथ ही भारी-भरकम गहनों की जगह कम कैरेट के हल्के वजन वाले डिजाइन ज्वेलरी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं । ग्राहकों के बदले रुख को देखकर ज्वैलर्स को आगामी त्योहारी मौसम में बिक्री मजबूत रहने की उम्मीद है।

हल्की ज्वैलरी की बढ़ी मांग

सोने के दाम सातवें आसमान पर होने के बावजूद देश के सबसे बड़े रत्न एवं आभूषण बाजार जावेरी बाजार में ज्वैलर्स के यहां ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है। इंडिया बुलियन एवं ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता कुमार जैन कहते हैं कि लोग समझ चुके हैं कि सोना सस्ता होने वाला नहीं है, त्योहारी सीजन नजदीक है इसीलिए लोग अपने ऑर्डर बुक करने के लिए ज्वैलर्स के यहां आ रहे हैं। सोना महंगा होने के कारण लोगों की पसंद बदल गई है अब लोग हल्की और डिजाइन वाली ज्वैलरी लेना पसंद करते हैं।

कुमार बताते हैं कि पहले गला और कान के सेट का वजह औसतन करीब 50 ग्राम होता था अब यह 15 ग्राम में आ गया है। लोग दो से तीन ग्राम की ज्वैलरी खरीदना पसंद कर रहे हैं।

महंगे सोने ने बदली ग्राहकों की पसंद

पुराने सोने की अदला-बदली अब खरीदारी में अहम भूमिका निभा रही है। पहले ग्राहक नए गहने खरीदने के लिए ज्वैलर्स के पास आते थे, लेकिन पुराने गहनों को एक्सचेंज करने वालों की संख्या ज्यादा हो गई है। बाजार में करीब 60 फीसदी ग्राहक पुराने गहनों को बदल कर नए गहने ले रहे हैं। ग्राहकों के बदले हुए इसी रुख के कारण ज्लैलर्स के यहां ग्राहकों की कोई कमी नहीं है।

सोने की तेजी से बढ़ती कीमतों ने खरीदारों को नई सोच अपनाने पर मजबूर कर दिया है। अब भारी-भरकम 22 कैरेट गहनों की जगह 18 कैरेट ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह दोनों के दाम में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक का फर्क है। जिससे बजट पर दबाव कम पड़ता है। साथ ही 18 कैरेट में हल्के और मॉडर्न डिजाइन मिलने लगे हैं। जिन्हें रोज ऑफिस या किसी फंक्शन में पहनना ज्यादा आसान और सुरक्षित माना जा रहा है। इसी कारण लोग अब 18 कैरेट गहनों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

त्योहारी सीजन में बेहतर बिक्री की उम्मीद

सोना महंगा होने के बावजूद ज्वैलर्स आगामी त्योहारी सीजन में खरीदारी बढ़ने का अनुमान लगा रहे हैं। ज्वेलरी एसोसिएशन बेंगलुर (जेएबी) के अध्यक्ष चेतन कुमार मेहता कहते हैं कि बाजार का रुझान स्पष्ट संकेत दे रहा है कि इस बार मांग बेहतर रहने वाली है। ज्वैलरी के साथ निवेश मांग भी अच्छी है। मैन्युफैक्चरर्स को बेहतर ऑर्डर मिले हैं। आने वाला सीजन ज्वैलरी कारोबार के लिहाज से शानदार रहने की उम्मीद है।

मेकिंग चार्ज ज्वैलर्स के मुनाफे की गारंटी

सोने के दाम बढ़ने के वजह से लोग कम वजन और पुराने सोना के बदले ज्लैलरी ले रहे हैं ऐसे में सवाल उठता है कि ज्वैलर्स को मुनाफा कैसे होगा। इस पर ज्वैलर्स कहते हैं कि हमारा धंधा मेकिंग चार्ज पर टिका है। इस समय बाजार में औसतन 10 फीसदी मेकिंग चार्ज लिया जा रहा है जबकि कुछ साल पहले प्रति ग्राम 500-600 रुपये मेकिंग चार्ज था।

इस पर ज्वैलर्स कहते हैं कि कम वजन की ज्वैलरी को बनाने में ज्यादा समय लगता है, कारीगर 6 से 7 फीसदी लेते हैं और ज्वैलर्स 10 फीसदी ले रहे हैं। जो उसके मुनाफे को मजबूत करता है फिर सोना सस्ता हो या फिर महंगा हो, इसका कारोबार में कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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सोने की मांग में सुधार का अनुमान

विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक आभूषणों की मांग में सुधार हुआ है, सोने की खरीदारी बढ़ी है। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ने से खुदरा विक्रेताओं और विनिर्माताओं ने त्योहारी मौसम से पहले अपना स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है। पहले टाली गई खरीदारी अब बाजार में लौट रही है। इससे दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है और आभूषण कारोबार में मांग सुधरी है। सोने के गहने बनाने वालों को भी मिलने वाले ऑर्डर बढ़ गए हैं।

ज्वैलरी विनिर्मातओं ने बढ़ाया स्टॉक

डब्ल्यूजीसी के अनुसार, सोने का आयात भी जुलाई के दौरान बढ़ा । लगातार दो महीने की कमजोरी के बाद जुलाई में सोने का आयात मूल्य बढ़कर 4.16 अरब डॉलर हो गया, जो जून के 1.97 अरब डॉलर की तुलना में दोगुने से अधिक है। मात्रा के लिहाज से आयात जून के करीब 20 टन से बढ़कर इसके 40-45 टन रहने का अनुमान है।

आयात में यह बढ़ोतरी त्योहारी मौसम से पहले भौतिक मांग और खुदरा विक्रेताओं तथा विनिर्माताओं द्वारा स्टॉक जमा करने का संकेत देते हैं। डब्ल्यूजीसी के मुताबिक अगस्त में सोने का आयात बढ़ने के बावजूद उसकी कुल माल आयात में हिस्सेदारी कम है। कुल माल आयात में सोने की हिस्सेदारी करीब पांच प्रतिशत रही, जबकि जनवरी-मार्च के दौरान इसका औसत 11 प्रतिशत था।

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First Published - August 24, 2026 | 3:40 PM IST

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