Govt procurement-pulses: केंद्र सरकार ने बिहार में ‘आत्मनिर्भर दलहन अभियान’ के तहत पहली बार संगठित रूप से मसूर की खरीद शुरू की गई है। इस अभियान में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित खरीद व्यवस्था को मजबूत करते हुए छत्तीसगढ़ में दलहन खरीद अभियान को भी तेज किया है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने पीएम-आशा योजना के अंतर्गत बिहार में NCCF ने पहली बार मसूर की व्यवस्थित खरीद शुरू की है। बिहार में मसूर खरीद का लक्ष्य 32,000 टन रखा गया है और 22 अप्रैल तक 100 टन मसूर की खरीद हो चुकी है। अब तक 16 PACS/FPO पंजीकृत हुए हैं और 59 किसानों को जोड़ा गया है। NAFED भी राज्यभर में अपने सहकारी नेटवर्क के जरिए मूल्य समर्थन योजना के तहत संचालन बढ़ाने की तैयारी में है। पीएम आशा योजना दलहन, तिलहन और खोपड़ा जैसी फसलों की खरीद सुनिश्चित करती है ताकि बाजार मूल्य गिरने पर किसानों को नुकसान न हो।
छत्तीसगढ़ में पीएम-आशा योजना के तहत सरकारी खरीद ने रफ्तार पकड़ ली है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में NCCF ने 63,325 टन चना और 5,360 टन मसूर की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि 22 अप्रैल तक 9,032 टन चना और 7.98 टन मसूर की खरीद हो चुकी है। चना के लिए 16,012 किसानों ने और मसूर के लिए 451 किसानों ने पंजीयन कराया है। अब तक 6,129 चना और 28 मसूर किसानों को मिलाकर कुल 6,157 किसानों को लाभ मिला है। वहीं NAFED ने राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से 137 केंद्र खोले गए हैं। अब तक 3,850 टन चना और 109 टन मसूर की खरीद की है। जिससे 2,926 किसान लाभान्वित हुए है।
मंत्रालय के बयान के मुताबिक किसानों का पंजीकरण E-Samyukti पोर्टल के जरिए डिजिटल रूप से किया जा रहा है और जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। फिलहाल 85 PACS केंद्र सक्रिय हैं और धमतरी, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जिलों में खरीद जारी है। सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया में जल्द विस्तार की योजना है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, विस्तारित PACS नेटवर्क और सहकारी-आधारित खरीद मॉडल से पारदर्शिता, दक्षता और किसानों की भागीदारी बढ़ी है। आने वाले दिनों में दोनों राज्यों में खरीद संचालन का और विस्तार किया जाएगा, जिससे किसानों को MSP का बेहतर लाभ मिल सके और देश की खाद्य व मूल्य स्थिरता को मजबूती मिले।