Crop Sowing: देश के ज्यादात्तर हिस्सों में पिछले दो सप्ताह से अच्छी बारिश हो रही है। इसके बावजूद चालू सीजन में करीब 13 फीसदी बरसात कम हुई है। बारिश कम होने का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल अभी तक फसलों की बुवाई 20.95 लाख हेक्टेयर कम है। फसलों का रकबा पिछले साल की सामान्य अवधि से करीब 2.02 फीसदी जबकि सीजन के सामान्य औसत से लगभग 6.5 फीसदी पीछे है।
भारत मौसम विभाग के मुताबिक, सीजन के दौरान देशभर में 1 जून से 15 अगस्त के बीच बारिश की कमी बढ़कर 13% हो गई है। सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में रिकॉर्ड की गई है। इस क्षेत्र में 15 अगस्त तक मॉनसून सीजन के दौरान बारिश की कमी बढ़कर 27.1 % हो गई है। दक्षिण भारत में बारिश की कमी 20.1% और उत्तर-पश्चिम भारत में 11.4 % रिकॉर्ड की दर्ज की गई।
बिहार के कुछ हिस्सों में बाढ़ की खबरें आ रही हैं लेकिन वह नदियों के जलस्तर बढ़ने की वजह से है। क्योंकि चालू सीजन में बिहार में अभी तक करीब आधी बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक, 1 जून से 16 अगस्त, 2026 के बीच बिहार में मानसून की बारिश की कमी 41%, आंध्र प्रदेश में 37%, पंजाब में 36%, असम में 26% और उत्तर प्रदेश में 22% रिकॉर्ड की गई है।
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 14 अगस्त तक खरीफ फसलों की रकबा 1,016.60 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 1,037.53 लाख हेक्टेयर था, यानी इसमें 2.02% की कमी आई है। पूरे खरीफ सीजन का औसत रकबा 1,104.46 लाख हेक्टेयर हैं । पिछले साल खरीफ सीजन के दौरान 1,134.27 लाख हेक्टेयर में क्षेत्र में फसलों की बुवाई की गई थी।
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कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, धान की बुआई 3.65% घटकर 379.07 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि दालों का कुल रकबा मामूली रूप से 0.32% घटकर 108.14 लाख हेक्टेयर हो गया। अरहर के रकबे में 4.03% और मूंग के रकबे में 4.09% की कमी आई। इसके उलट, उड़द का रकबा 13.14% बढ़कर 23.52 लाख हेक्टेयर हो गया।
तिलहन का कुल रकबा 0.48% घटकर 184.46 लाख हेक्टेयर रह गया, हालांकि मूंगफली में 2.16%, तिल में 18.65% और सूरजमुखी में 75.83% की बढ़ोतरी हुई। सोयाबीन का रकबा 1.44% घटकर 120.84 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि अरंडी (कैस्टरसीड) में 38.02% की गिरावट आई। कपास का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले 0.87% कम रहा। मोटे अनाज के मामले में भी मिली-जुली स्थिति रही। मोटे अनाज का कुल रकबा 2.36% घटा; इसमें मक्का 3.98% और रागी में भारी गिरावट (34.24%) देखी गई। हालांकि, ज्वार और बाजरा के रकबे में क्रमशः 5.47% और 1.09% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
खरीफ की खेती का कुल रकबा कम होने से कृषि उत्पादों की कीमतों को सहारा मिल रहा है, जबकि कुछ खास तिलहन और दालों के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी से अलग-अलग कमोडिटी की सप्लाई से जुड़ी चिंताओं को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, कृषि जिंसों की कीमतों को सहारा मिलता रहने की संभावना है क्योंकि भारत में कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर से कम है। धान, सोयाबीन और मक्का जैसी प्रमुख फसलों का कम रकबा उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ा सकता है, खासकर तब जब फसल के विकास के चरण में मौसम की स्थिति कम अनुकूल हो। हालांकि, कुछ खास तिलहन और दालों की खेती के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी से अलग-अलग कमोडिटी की सप्लाई से जुड़ी कीमतों में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है।