facebookmetapixel
त्योहारी मांग और नीतिगत समर्थन से ऑटो सेक्टर रिकॉर्ड पर, यात्री वाहन बिक्री ने बनाया नया इतिहासTata Motors मजबूत मांग के बीच क्षमता विस्तार पर दे रही जोर, सिएरा और पंच फेसलिफ्ट से ग्रोथ को रफ्तार!अधिग्रहण से अगले वर्ष रेवेन्यू 1.5 फीसदी बढ़ेगा, 5G और एआई पर दांव: एचसीएलटेकक्विक कॉमर्स में अब नहीं होगी ‘10 मिनट में डिलिवरी’! गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर सरकार सख्तईरान से व्यापार करने वाले देशों पर ट्रंप का 25% टैरिफ, भारत के बासमती चावल और चाय निर्यात पर मंडराया खतराबजट से पहले क्रिप्टो एक्सचेंजों पर सख्त नियमों की तैयारी, सेबी को मिल सकती है बड़ी नियामकीय भूमिका!Editorial: जर्मन चांसलर मैर्त्स की भारत यात्रा से भारत-ईयू एफटीए को मिली नई रफ्तारवीबी-जी राम जी का बड़ा बदलाव: ग्रामीण बीमा से मैनेज्ड इन्वेस्टमेंट की ओर कदमग्लोबल AI सिस्टम की नई पटकथा लिखी जा रही है, भारत के समक्ष इतिहास रचने का मौकाबाजारों ने भू-राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में नहीं रखा, घरेलू मांग बनेगी सुरक्षा कवच

चार साल में पहली बार दो दिन में इतना फिसला कच्चा तेल

Last Updated- December 07, 2022 | 9:08 PM IST

अमेरिकी बैंक लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने और वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकट के गहराने से मंगलवार को एशियाई कारोबार में तेल की कीमतों में खासी गिरावट देखने को मिली।


न्यू यॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज के मुख्य सौदा यानी लाइट स्वीट क्रूड के अक्तूबर अनुबंध में 3.96 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट हुई और यह 91.76 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया। इससे पहले सोमवार को न्यू यॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में यह अनुबंध 5.47 डॉलर गिरकर 95.71 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था।

इस तरह महज दो दिन में ही कच्चे तेल की कीमतों में 9.41 डॉलर की कमी हो चुकी है। पिछले चार साल में दो दिन के भीतर कच्चे तेल की कीमत में होने वाली यह सबसे बड़ी गिरावट है। ब्रेंट नॉर्थ सी कच्चा तेल का नवंबर अनुबंध भी 3.32 डॉलर प्रति बैरल गिरकर 90.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

उल्लेखनीय है कि ब्रेंट नॉर्थ सी का अक्तूबर सौदा सोमवार को 5.20 डॉलर की कमी के साथ 92.38 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। ब्रेंट नॉर्थ सी कच्चे तेल के वायदा कारोबार की 1988 में शुरुआत के बाद पहली बार लगातार 14 दिन तक इसमें कमी आई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वित्तीय क्षेत्र की संकटों ने ढांचागत जोखिम के भय को बहाल किया है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव तेल और जिंसों के कारोबार और कीमत पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने और बैंक ऑफ अमेरिका द्वारा मेरिल लिंच के अधिग्रहण की गूंज अभी जारी रहेगी। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तो पड़ेगा ही तेल की मांग भी इससे प्रभावित होगी।

उम्मीद की जा रही है कि फेडरल रिजर्व अब ब्याज दर में कम से कम 25 बेसिस अंक की कटौती कर सकता है। हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद एशियाई विकास बैंक का कहना है कि लंबे समय के लिए कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास ही रहेंगी। इस बैंक का कहना है कि सस्ते तेल के दिन अब लद गए।

First Published - September 17, 2008 | 12:16 AM IST

संबंधित पोस्ट