कच्चे माल, परिवहन, श्रम और पैकेजिंग सामग्री की लागत अधिक बनी रहने या और भी ज्यादा हो जाने की वजह से दैनिक उपभोग वाली वस्तुओं (एफएमसीजी) के विनिर्माताओं को दामों में अगले महीने दोबारा इजाफा होने की संभावना दिख रही है।
चाहे पैकेटबंद गेहूं का आटा और बासमती चावल हों या बिस्कुट और शैंपू, ये उत्पाद दो से 10 फीसदी तक और महंगे हो जाएंगे।
अदाणी विल्मर अगले महीने अपने पैकेटबंद गेहूं के आटे की कीमतों में पांच से आठ फीसदी तक और बासमती चावल की कीमतों में आठ से 10 फीसदी तक की वृद्धि करेगी। अदाणी विल्मर के मुख्य कार्याधिकारी अंगशु मलिक ने कहा ‘जिंसों की लागत अधिक है और परिवहन तथा श्रम जैसी अन्य लागतों में भी पांच से आठ फीसदी तक का इजाफा हो चुका है, इस कारण हमें कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी।’ मलिक ने कहा कि पैकेजिंग की लागत 15 से 18 फीसदी तक अधिक है।
पारले प्रोडक्ट्स भी जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान कीमतों में चार से पांच फीसदी की बढ़ोतरी का एक और दौर चलाएगी। चालू वित्त वर्ष में इस बिस्कुट निर्माता द्वारा किया जाने वाली दामों में यह दूसरा इजाफा होगा। पारले प्रोडक्ट्स के श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा कि हमने मौजूदा तिमाही में कुछ पैक की कीमतों में बढ़ोतरी की है और हमें अगली तिमाही में अन्य पैक की कीमतों में बढ़ोतरी का एक और दौर शुरू करना होगा, क्योंकि पिछले साल की तुलना में कच्चे माल की लागत ज्यादा है।
चालू तिमाही के दौरान पारले ने ज्यादातर उत्पादों की कीमतों में पांच से 10 फीसदी की बढ़ोतरी की है। कंपनी ने इस साल फरवरी और मार्च में भी कीमतों में पांच से 10 फीसदी की बढ़ोतरी की थी।
डाबर इंडिया देखो व इंतजार करो की रणनीति अपना रही है क्योंकि उसकी नजर महंगाई पर है। अगर महंगाई जारी रही तो कंपनी जनवरी-मार्च तिमाही में कीमत बढ़ा सकती है। डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, हाल की तिमाहियों में महंगाई अप्रत्याशित तौर पर 9 फीसदी से ज्यादा रही है। हमने इस असर को कम करने के लिए लागत बचाने के उपाय के अलावा कीमतों में 3 से 4 फीसदी का इजाफा किया। उन्होंने कहा कि महंगाई में बढ़ोतरी चिंता का विषय बना रहेगा। हमारा इरादा इस असर को धीरे-धीरे कीमत बढ़ोतरी व लागत बचत के पहल से कम करने का है।
पर्सनल केयर उत्पाद निर्माता कैविनकेयर ने भी शैंपू व स्किनकेयर उत्पादोंं के दाम अगले महीने से 2-3 फीसदी बढ़ाएगी। साल की पहली छमाही में कंपनी ने कीमतें करीब 3 फीसदी बढ़ाई थी।
कैविनकेयर के सीईओ वेंकटेश विजयराघवन ने कहा, शैंपू के मामले में हमने कीमतें मोटे तौर गैर-सैशी श्रेणियों में बढ़ाई है। गेहूं की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा है। कच्चे पाम तेल की कीमतें औसतन 2020 के मुकाबले इस साल 36.5 फीसदी बढ़ी है।
हालांकि अदाणी विल्मर ने पिछले 45 दिन में खाद्य तेलों की कीमतें घटाई है क्योंकि सरकार ने आयात शुल्क में कटौती की है। कंपनी ने एक लीटर सोयाबीन तेल बैक की कीमतें 175 रुपये से घटाकर 155 रुपये कर दी है और सनफ्लावर तेल की कीमतें 170 से घटाकर 150 रुपये कर दी है।
मलिक ने कहा, हमे खाद्य तेल की कीमतें घटाई है क्योंकि इस पर आयात शुल्क घटा है और हम इसका फायदा ग्राहकों को दे रहे हैं। हम इस कीमत कटौती की जानकारी ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन भी देंगे।