facebookmetapixel
Advertisement
1 साल के लिए कहां लगाएं पैसा? 444 दिन की FD पर SBI, PNB और BOB दे रहे कितना ब्याज, जानें पूरा हिसाबIPO मार्केट में NSE तोड़ेगा रिकॉर्ड! ₹5.26 लाख करोड़ के वैल्युएशन पर इश्यू लाने की तैयारी‘द केरला स्टोरी’ बनाने वाली कंपनी का IPO खुला, ₹282 करोड़ जुटाने की योजना; निवेश से पहले चेक करें प्राइस बैंड, GMPखुलने जा रहा नया IPO; ₹825 करोड़ जुटाने का है प्लान, कब होगी लिस्टिंग?15 अगस्त तक बारिश की कमी 13%, खरीफ बुवाई पर दिख रहा असर; धान का रकबा घटाइंफ्रा-मैन्युफैक्चरिंग की मांग से बनी रह सकती है मेटल शेयरों की चमक, इन 2 स्टॉक्स पर BUY की रायदौड़ने को तैयार ये 5 दमदार फंडामेंटल वाले शेयर! ब्रोकरेज बुलिश, 26% तक रिटर्न संभवमिल्की मिस्ट IPO की लिस्टिंग पर बरसा पैसा! निवेशकों को हर लॉट पर ₹4440 तक का प्रॉफिट, शेयर अब बेच दें या रखें?भारतीय चुनाव व्यवस्था की ट्रंप ने की तारीफ, अमेरिका में वोटर आईडी अनिवार्य करने की वकालतStock Picks: 3 शेयरों में खरीदारी का मौका! ₹554 तक जा सकते हैं भाव, जानें टारगेट और SL

El Nino Effect: भारत में मानसून 40% कमजोर, फसलों और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा खतरा

Advertisement

बारिश की कमजोर शुरुआत से चावल, सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। कंस्ट्रक्शन जैसे अहम सेक्टर्स में दिक्कते पैदा हो रही हैं

Last Updated- June 18, 2026 | 10:45 AM IST
India Monsoon 2026
फाइल फोटो

India Monsoon 2026: भारत में मानसून की शुरुआत असामान्य रूप से कमजोर रही है और बारिश की यह कमी आगे भी जारी रह सकती है। इससे फसलों और औद्योगिक गतिविधियों पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि अल-नीनो का प्रभाव अब दिखने लगा है। भारत मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार तक देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य से लगभग 40 फीसदी कम रही।

मानसून का मौसम जून से सितंबर तक चलता है और देश की सालाना बारिश का बड़ा हिस्सा इसी दौरान होता है। बारिश की इस कमजोर शुरुआत से चावल, सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है, वहीं कंस्ट्रक्शन जैसे अहम सेक्टर्स में भी दिक्कते पैदा हो रही हैं। यह उन शुरुआती संकेतों में से एक है जो दिखाते हैं कि हाल ही में विकसित हुआ अल-नीनो वैश्विक मौसम पैटर्न को किस तरह प्रभावित कर रहा है। ऐतिहासिक रूप से अल-नीनो का संबंध दक्षिण एशिया में सूखे जैसी स्थितियों से रहा है।

India Monsoon 2026: अबतक के सबसे श​क्तिशाली अल-नीनो में से एक

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक हो सकता है। मौसम मॉडल फिलहाल संकेत दे रहे हैं कि जुलाई और अगस्त के दौरान भारत में सामान्य से कम बारिश की स्थिति खासकर उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत में बनी रह सकती है।

ये भी पढ़ें… Bond market outlook: फेड के सख्त रुख से भारतीय सरकारी बॉन्ड में गिरावट का दबाव

Atmospheric G2 के मौसम विज्ञानी ( सीनियर डिजिसन सपोर्ट) ताकाहिसा निशिकावा ने कहा, “हमें फिलहाल ऐसा कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहा है जिससे मौजूदा नेशनल बारिश डेफिसिट सामान्य स्तर तक वापस आ सके। बारिश में जो सुधार दिख रहा है, वह अधिकतर अस्थायी या कुछ क्षेत्रों तक सीमित हो सकता है, न कि पूरे मानसून के सामान्य होने का संकेत।”

मानसूनी बारिश भारत में कृषि के लिए बेहद अहम

भारत में मानसूनी बारिश कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। देश दुनिया के सबसे बड़े चावल, चीनी और कपास उत्पादकों में शामिल है और किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर रहते हैं। अगर फसल उत्पादन कमजोर रहता है तो सरकार को निर्यात प्रतिबंध लगाने पड़ सकते हैं।

मुंबई की जलापूर्ति एजेंसी ने भी हाल ही में कंस्ट्रक्शन साइट्स को पानी की आपूर्ति रोक दी है। पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि ऐसा कदम उठाया गया है। एजेंसी ने व्यवसायों, कारखानों और खेल क्लबों के लिए भी पानी की आपूर्ति कम कर दी है तथा स्विमिंग पूलों को पानी देना बंद कर दिया है।

India Monsoon 2026: अगले सप्ताह बारिश में सुधार के संकेत

निशिकावा के अनुसार, अगले सप्ताह बारिश में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। दक्षिण-पश्चिमी नम हवाएं मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और यह जुलाई की शुरुआत तक उत्तर भारत की ओर बढ़ता रहेगा। हालांकि इसके बाद की व्यापक परिस्थितियां अभी भी अनुकूल नहीं दिख रही हैं।

मार्कस वेदर इंक के उपाध्यक्ष फर्गस कीटिंगे ने कहा कि मानसून की कमजोर शुरुआत का असर अब हमारी फसल-मौसम चेतावनियों में भी दिखने लगा है। भारत के सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक क्षेत्रों के लिए गंभीर सूखे की नई चेतावनियां जारी की गई हैं।

ये भी पढ़ें… रिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझें

किसान साल की सबसे बड़ी बुआई अवधि के बीच

कीटिंगे ने कहा कि यह असामान्य सूखापन जुलाई तक जारी रह सकता है, जिससे सोयाबीन की बुआई में देरी हो सकती है और फसल की बढ़वार की अवधि भी कम हो सकती है।

इस समय किसान साल की सबसे बड़ी बुआई अवधि के बीच हैं और अगर जल्द ही बारिश में सुधार होता है तो फसलों की स्थिति संभल सकती है। हालांकि आधिकारिक पूर्वानुमान एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून की ओर इशारा कर रहे हैं। कीटिंगे ने कहा कि डेवलप हो रहा मजबूत अल-नीनो एक प्रमुख कारण है, क्योंकि इससे भारतीय मानसून कमजोर और असमान रहने का जोखिम बढ़ जाता है।

Advertisement
First Published - June 18, 2026 | 10:45 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement