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Editorial: कच्चा तेल सस्ता, लेकिन वैश्विक वित्तीय जोखिम अब भी भारत के लिए चुनौतीम्युचुअल फंड बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर बहस और जमीनी हकीकतश्रम आय को नहीं, तो पूंजीगत लाभ को भी विशेष कर रियायत क्यों?सेबी का शिकंजा: पंप-एंड-डंप स्कीम में 222 इकाइयों पर प्रतिबंध, ₹47.7 करोड़ का जुर्मानामई के उच्चस्तर के बाद जून में घटा कैश मार्केट में टर्नओवर, F&O कारोबार में बढ़त बरकरारडॉलर की मजबूती से रुपया 59 पैसे टूटा, तीन सप्ताह की सबसे बड़ी गिरावट प​श्चिम ए​​शिया में तनाव में कमी के बाद बर्नस्टीन और मैक्वेरी ने अपने इंडिया पोर्टफोलियो में बदलाव कियाStock Market: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 444 अंक उछलाPrivate Capex में बड़ी छलांग, नई परियोजनाओं में 90% हिस्सेदारी; पावर सेक्टर ने दिखाई ताकतWhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, Meta से 3 दिन में मांगा जवाब; लॉन्च पर लग सकती है रोक

लेखक : अरुणाभ घोष

आज का अखबार, लेख

जलवायु संकट से निपटने के लिए सिर्फ वादों से नहीं चलेगा काम, ठोस कदम उठाने की जरूरत

करीब 10 दिनों की गहन बातचीत के बाद ब्राजील के बेलेम शहर से यह संदेश स्पष्ट है: हम कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (कॉप) वार्ताओं के कठिन चरण में हैं। आरंभिक वक्तव्य अब फीका पड़ चुका है और अब जरूरत है कि जलवायु संकट के अनुरूप एक ठोस प्रतिक्रिया तैयार की जाए। लगातार बारिश से हो रहे […]

आज का अखबार, लेख

निराशा से समाधान तक: कैसे भारत पराली जलाने की समस्या का कर सकता है अंत

उत्तर भारत में फसलों के अवशेष यानी पराली जलाने का काम शुरू हो चुका है। बीते सात वर्षों में कई उपाय किए गए ताकि प्रदूषण बढ़ाने वाले इस चलन पर अंकुश लगाया जा सके। इस दौरान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण से लेकर जैव ईंधन परियोजनाओं का सहयोग करने और जुर्माना लगाने तक जैसे […]

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