न्यायमूर्ति बी डी अहमद और विभू बाखरू की पीठ ने फेसबुक और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटांे का इस्तेमाल करने वाले भारतीय बच्चांे पर चिंता जताई। सोशल नेटवर्किंग साइटांे का इस्तेमाल करने वाले इन बच्चांे को बाद मंे बड़े लोगांे द्वारा जानबूझकर या अनजाने मंे जाल मंे फंसाया जाता है।
पीठ ने कहा, हम उन बच्चांे को लेकर चिंतित हैं जो सोशल नेटवर्किंग साइट का हिस्सा हैं और कुछ बड़े लोग उनको गुमराह कर उनका लाभ उठा रहे है। हम उनके डाटा का बड़ांे द्वारा अपने लाभ के लिए इस्तेमाल को लेकर भी चिंतित हैं।
अदालत ने कहा कि फेसबुक और गूगल के वकील इस बारे मंे चार सप्ताह मंे सुझाव दैंगे। अदालत का यह निर्देश फेसबुक इंक के वकील द्वारा यह बताए जाने के बाद आया कि इस साइट का परिचालन अमेरिकी कानून चिल्ड्रेन आनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 13 साल से कम उम्र के बच्चांे को इन साइटांे पर अपना अकाउंट खोलने की अनुमति नहीं है।