निजी क्षेत्र को राहत देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने भूमि अधिग्रहण विधेयक पर संसद की स्थायी समिति के सुझाव नहीं माने जाने का आज संकेत दिया। समिति ने विधेयक से उस प्रावधान को हटाने की सिफारिश की थी, जिसके तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं (पीपीपी) के लिए भूमि अधिग्रहण करने की जिम्मेदारी सरकार को सौंपी गई थी।
कुछ ऐसे ही विचार वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने भी व्यक्त किए। शर्मा ने कहा कि उनका मंत्रालय विनिर्माण और औद्योगिक गतिविधियों के साथ किसी भी तरह के समझौते को अनुमति नहीं देगा क्योंकि ये राष्ट्रीय प्राथमिकता हैं। समिति का एक सुझाव यह था कि सरकार को पीपीपी के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं करना चाहिए। समिति ने तर्क दिया कि दुनिया के किसी भी देश में सरकार निजी कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं करती है और जब सरकार निजी क्षेत्र के लिए पूंजी और श्रम नहीं जुटाती, तो उसे भू अधिग्रहण भी नहीं करना चाहिए।
लेकिन रमेश ने इन दोनों तर्कों को खारिज करते हुए कि अगर सरकार भूमि अधिग्रहण नहीं करती, तो देश में आज इतने उद्योग नहीं होते। कांग्रेस के सांसद मणिशंकर अय्यर ने समिति की सिफारिश का समर्थन करते हुए कहा कि किसी देश में सरकार भूमि अधिग्रहण में निजी क्षेत्र की मदद नहीं करती है। इस बारे में रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि किसी और देश में केरोसिन पर भी सब्सिडी नहीं दी जाती है।
मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि रक्षा मंत्री ए के एंटनी रक्षा संबंधी अधिनियमों को विधेयक के दायरे में लाने के पक्ष में हैं लेकिन वाणिज्य एवं अन्य मंत्रालय की सेज पर राय इससे जुदा हो सकती है।
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