देश के बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उतरने के लिए स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया कई तरीकों पर विचार कर रही है। इनमें पूरी तहर से तैयार वैश्विक मॉडलों का आयात करना, वाहनों को स्थानीय स्तर पर असेंबल करना और देश में स्थानीय स्तर पर वाहन बनाना शामिल है।
स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी पीयूष अरोड़ा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमें ऐसी सही मॉडल की पहचान करनी होगी जिसे हम स्थानीय रूप दे सकें, ताकि वह भारतीय बाजार के लिए प्रासंगिक भी हो।’
अरोड़ा ने कहा कि वैश्विक मॉडलों को पूरी तरह से तैयार वाहन (एफबीयू) वाले मार्ग के जरिये थोड़ा जल्दी उतारा जा सकता है। इसके अलावा आयातित हिस्सों और पुर्जों का इस्तेमाल करके स्थानीय स्तर पर वाहन असेंबल करने का भी एक विकल्प है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी स्थानीय स्तर पर बने ईवी विकसित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
अरोड़ा ने कहा, ‘हम भारत के लिए वैश्विक पोर्टफोलियो का सक्रिय रूप से मूल्यांकन कर रहे हैं।’ कंपनी सही मॉडल, उसके स्थानीयकरण की संभावना और उस श्रेणी का आकलन करेगी जिसमें वह मुकाबला कर सकती है।
कंपनी ने भारत में अपना अगला ईवी पेश करने के मामले कोई समय-सीमा तय नहीं की है। अरोड़ा ने कहा कि नए वाहन बनाने में लंबा समय लगता है, हालांकि अगर कारोबार के लिहाज से सही हो, तो वैश्विक मॉडल को देश में जल्दी से लाया जा सकता है।
कंपनी ने पहले भारत के लिए कोई शुरुआती स्तर वाला इलेक्ट्रिक स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) विकसित करने पर विचार किया था। अरोड़ा ने साल 2024 में कहा था कि समूह इस बात का आकलन कर रहा है कि किस प्लेटफॉर्म को कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक एसयूवी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
ईवी की उनकी यह योजना ऐसे समय आ रही है जब भारत के यात्री वाहन बाजार में वैकल्पिक इंजन की हिस्सेदारी बढ़ रही है। अरोड़ा को उम्मीद है कि ईवी की जो पैठ उनके अनुमान से अभी 7 से 8 प्रतिशत है, वह इस दशक के आखिर तक 17 से 18 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
इस बदलाव की वजह से कंपनी अपने संभावित बाजार का फिर से आकलन कर रही है। अरोड़ा ने कहा कि कंपनी की बिक्री तो बढ़ रही है, लेकिन बाजार हिस्सेदारी पर असर पड़ा है। इसकी वजह यह है कि भारत के यात्री वाहन बाजार में हालिया बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा वैकल्पिक इंजन तकनीक का रहा रहा है, जिसमें कंपनी की मौजूदगी अभी सीमित है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के आंकड़ों के अनुसार फोक्सवैगन समूह की खुदरा बिक्री वित्त वर्ष 25 में दर्ज 84,810 वाहनों के मुकाबले वित्त वर्ष 26 में 29.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.10 लाख वाहन हो गई। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 2.04 प्रतिशत से बढ़कर 2.34 प्रतिशत हो गई।
इस बिक्री में बड़ा हिस्सा स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया का रहा और कंपनी की बिक्री एक साल पहले दर्ज 84,267 वाहनों से बढ़कर 1.09 लाख वाहन हो गई। लेकिन जुलाई में समूह की बिक्री की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई। खुदरा बिक्री पिछले साल के इसी महीने में दर्ज 8,902 के मुकाबले 7.6 प्रतिशत घटकर 8,221 वाहन रह गई, साथ ही मासिक बाजार हिस्सेदारी भी 2.55 प्रतिशत से घटकर 1.9 प्रतिशत रह गई।