सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) युवाओं को प्रशिक्षण देने और प्रवेश स्तर पर भर्ती की पाइपलाइन बनाने की तैयारी में हैं। इसके लिए बैंक युवा मामलों और खेल मंत्रालय के ‘मेरा युवा भारत’ पोर्टल का उपयोग करेंगे। यह तैयारी ऐसे समय में हो रही है, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को अगली पीढ़ी के ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए युवाओं के अनुकूल बनने को कहा है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2 अक्टूबर से शुरू हो रही एक माह की ‘बैंकिंग फॉर यूथ’पहल के तहत युवा ग्राहकों को जोड़ने और वित्तीय साक्षरता व डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बनाई है। साथ ही बैंक युवाओं के लिए इंटर्नशिप और प्रवेश स्तर की नौकरियों की भी पेशकश करेंगे।
बैंकों ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत इंटर्नशिप के माध्यम से माई भारत पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि प्रशिक्षित उम्मीदवारों को बाद में सरकारी बैंकों में प्रवेश स्तर के पदों पर लेने के लिए विचार किया जा सकता है।
भर्ती के अलावा युवा ग्राहकों को बैंक से जोड़ना और उनके साथ दीर्घकालिक संबंध बनाना भी पहल के प्रमुख मकसद में शामिल है। छात्रों और युवा पेशेवरों के लिए वित्तीय साक्षरता और डिजिटल बैंकिंग जागरूकता कार्यक्रमों के लिए भी उसी पोर्टल का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। इसमें वित्तीय साक्षरता और डिजिटल बैंकिंग पर मॉड्यूल शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य डिजिटल वित्तीय सेवाओं के सुरक्षित उपयोग के बारे में चिंता से जुड़ी बाधाओं को दूर करना है।
युवा मामले और खेल मंत्रालय 2023 में माई भारत पोर्टल पेश किया गया था। यह 15-29 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह स्वयंसेवी अवसरों, अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों, कौशल-विकास कार्यशालाओं और व्यावसायिक मार्गदर्शन से उपयोगकर्ताओं को जोड़ने वाले एक सिंगल-विंडो हब के रूप में काम करता है।
बैंक के अधिकारियों ने पिछले सप्ताह वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) द्वारा आयोजित पीएसबी कॉन्फ्लुएंस में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ रणनीति पर विस्तृत चर्चा की थी। ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ दो दिवसीय कार्यक्रम में चर्चा किए गए 7 विषयों में से एक था। सम्मेलन के समापन सत्र में सीतारमण ने सरकारी बैंकों से अपनी ‘सरकारी बैंक’ की छवि छोड़ने और युवा ग्राहकों को आकर्षित करने और उनके साथ दीर्घकालिक संबंध बनाने के लिए ‘कूल’ बनने को कहा था।
उन्होंने सरकारी बैंकों से खाता खोलने की पहलों के माध्यम से कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कौशल-विकास संस्थानों तक अभियान चलाने को कहा। उन्होंने युवा ग्राहकों को बैंकिंग और क्रेडिट उत्पादों से जोड़ने में मदद करने के लिए शाखाओं में समर्पित ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ का भी सुझाव दिया। सीतारमण ने कहा कि इस अभियान को एकमुश्त खाता-खोलने के अभ्यास के बजाय दीर्घकालिक बैंकिंग संबंध की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। फिच सहित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत में बढ़ती युवा बेरोजगारी की चिंताओं को उजागर किया है और इस मुद्दे के समाधान के लिए कदम उठाने का आह्वान
किया है।