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सरकार का नया मास्टरस्ट्रोक! राज्यों को मिलेगा परफॉर्मेंस बेस्ड फंड, मनरेगा होगा रिप्लेस

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केंद्र सरकार 2026 से मनरेगा की जगह वीबी-जी-राम जी अधिनियम लागू करने जा रही है, जिसमें ग्रामीण रोजगार फंड का आवंटन प्रदर्शन आधारित होगा।

Last Updated- May 25, 2026 | 10:04 AM IST
MGNREGA

विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 (वीबी-जी-राम जी) के तहत मसौदा नियम शनिवार को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी हुए। इसमें कहा गया है कि केंद्र एक वित्त वर्ष में राज्यों को ‘मानक’ निधि आवंटन के लिए वस्तुनिष्ठ मानदंडों में से एक के रूप में 16वें वित्त आयोग के क्षैतिज हस्तांतरण फॉमूले का उपयोग करेगा।

मसौदे में यह भी कहा गया है कि अधिनियम के लागू होने के तत्काल बाद (यानी वित्त वर्ष 27 से) ‘मानदंड-आधारित’ आवंटन का एक हिस्सा प्रदर्शन मानदंडों के आधार पर भी निर्धारित किया जा सकता है। इन मानदंडों में समय पर मजदूरी भुगतान, सामाजिक ऑडिट आवश्यकताओं का अनुपालन, एक वित्तीय वर्ष में पूरा किए गए कार्यों का प्रतिशत और केंद्र द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किए जाने वाले अन्य प्रदर्शन-संबंधी संकेतक शामिल हैं।

केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मानदंड-आधारित आवंटन प्रदर्शन मानदंडों या केंद्र द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले किसी अन्य मापदंड पर आधारित होगा। वीबी-जी राम जी 1 जुलाई, 2026 से पूरे भारत में लागू होगा और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्थान लेगा। वीबी-जी राम जी के मसौदा नियमों पर 21 जून, 2026 तक टिप्पणियां प्रस्तुत की जा सकती हैं।

सिविल सोसायटी के एक समूह ने वीबी जी राम जी अधिनियम की आलोचना करते हुए कहा है कि ‘मानक’ आवंटन ने केंद्र को राज्यों को आवंटित की जाने वाली धनराशि की मात्रा मनमाने ढंग से तय करने का अधिकार दे दिया है। इससे यह भी निर्धारित होगा कि उस राज्य में कितने दिनों का रोजगार प्रदान किया जा सकता है, जो मनरेगा की मांग-आधारित भावना के विरुद्ध है।

हालांकि केंद्र ने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में इस योजना का खंडन किया है। इसमें कहा गया है कि ‘मानदंड-आधारित’ धन मुहैया कराना वीबी-जी रैम जी को भारत सरकार की ज्यादातर योजनाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले बजट मॉडल के अनुरूप बनाता है और इस दौरान रोजगार गारंटी को भी कम नहीं किया गाय है। इसमें तर्क दिया गया था कि मांग-आधारित मॉडल अप्रत्याशित आवंटन और बजट मिलान में विसंगति पैदा कर सकता है।

मसौदा नियमों में यह भी कहा गया है कि केंद्र और राज्यों के बीच कोष का साझा करना अधिनियम की धारा 22 के उप-खंड (2) के अनुसार होगा, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40 और उत्तर-पूर्वी और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 है।

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First Published - May 25, 2026 | 10:04 AM IST

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