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मोदी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी, सहयोगियों की हो सकती है वापसी

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पहले कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री ने मंत्रिपरिषद में तीन बार- 9 नवंबर, 2014 को, 5 जुलाई, 2016 को और 3 सितंबर, 2017 को फेरबदल किया था।

Last Updated- July 14, 2023 | 11:06 PM IST

साल 2019 भारतीय जनता पार्टी (BJP) के छोटे सहयोगियों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 352 सीट में से 14 फीसदी यानी 49 सीट में जीत दर्ज की थी। चार साल बाद अब उनमें से महज तीन सहयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 75 सदस्यीय केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल हैं।

अब मंत्रिपरिषद में पुनर्गठन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि भाजपा अपने अन्य सहयोगियों की वापसी कर सकती है। भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महाराष्ट्र और बिहार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

ऐसे में प्रधानमंत्री अपने मंत्रिपरिषद में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) जैसे नए साझेदारों के सांसदों को भी शामिल करने पर विचार कर सकते हैं।

तीन प्रमुख हिंदीभाषी राज्यों में दिसंबर तक विधानसभा चुनाव

हिंदीभाषी तीन प्रमुख राज्यों में दिसंबर तक विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय जैसे महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों के नेतृत्व में भी बदलाव कर सकते हैं। साथ ही मंत्रियों को 2024 की तैयारी के लिए क्षेत्र में भेज सकते हैं।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के गृह राज्य हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के मद्देनजर पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी काफी महत्त्वपूर्ण हो गई है।

इस महीने के आरंभ में मंत्रिपरिषद की एक बैठक में मोदी ने दिसंबर तक पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर जोर दिया था जिसका मतलब बुनियादी ढांचे से संबंधित मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना हो सकता है।

फेरबदल के लिए अगले सप्ताह की शुरुआत में केवल तीन दिनों का समय 

प्रधानमंत्री गुरुवार को फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की तीन दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए और संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हो रहा है। ऐसे में मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए अगले सप्ताह की शुरुआत में केवल तीन दिनों का समय होगा।

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 45 सदस्यीय मंत्रिपरिषद ने 26 मई, 2014 को शपथ ली थी। पहले कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री ने मंत्रिपरिषद में तीन बार- 9 नवंबर, 2014 को, 5 जुलाई, 2016 को और 3 सितंबर, 2017 को फेरबदल किया था। इनमें से आखिरी फेरबदल सबसे महत्त्वपूर्ण था। उसके तहत प्रधानमंत्री ने पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान और निर्मला सीतारमण को कैबिनेट का दर्जा दिया गया था। साथ ही पूर्व अफसरशाह हरदीप सिंह पुरी, आरके सिंह, सत्यपाल सिंह और केजे अल्फोंस को मंत्रिमंडल में शामिल किया था।

अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री ने केवल एक बार यानी दो साल पहले 7 जुलाई, 2021 को मंत्रिपरिषद का विस्तार किया था। मगर वह 2014 के बाद का सबसे बड़ा फेरबदल था। उस फेरबदल के साथ ही मंत्रियों की संख्या 54 से बढ़कर 78 हो गई थी और करीब एक दर्जन मंत्रियों को अपना पद छोड़ना पड़ा था।

साल 2022 में उत्तर प्रदेश जैसे महत्त्वपूर्ण राज्य में विधानसभा चुनाव से करीब दस महीने पहले वह फेरबदल किया गया था। उसके तहत मोदी ने उन सांसदों को अपने मंत्रिपरिषद में जगह दी जो अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों से थे।

चिराग पासवान को मंत्रिपरिषद में मिल सकती है जगह

उसी फेरबदल के दौरान कृषि मंत्रालय से संबंधित सहकारिता विभाग को एक स्वतंत्र विभाग के तौर पर अलग किया गया और उसका प्रभार गृह मंत्री को दिया गया था। साथ ही, सार्वजनिक उपक्रम विभाग (डीपीई) को भारी उद्योग मंत्रालय से वित्त मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया था।

आगामी फेरबदल के तहत लोकसभा सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है। वह लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) गुट के प्रमुख हैं। फिलहाल उनके चाचा पशुपति कुमार पारस लोजपा के दूसरे गुट का नेतृत्व कर रहे हैं। अपना दल (सोनेलाल) की अनुप्रिया पटेल और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के रामदास आठवले ऐसे तीन मंत्री हैं जो व्यापक राजग का प्रतिनिधित्व करते हैं।

मौजूदा 75 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में 11 महिलाएं

प्रधानमंत्री संभवत: राकांपा के राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से किसी एक सहयोगी को अपने मंत्रिपरिषद में जगह दे सकते हैं। शिरोमणि अकाली दल और तेलुगू देशम पार्टी जैसे भाजपा के अलग हो चुके सहयोगियों को भी साथ लाने की कोशिश की जा सकती है।

मौजूदा 75 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में 11 महिलाएं हैं। उसमें उत्तर प्रदेश 14 मंत्रियों के साथ सबसे आगे है। उसके बाद महाराष्ट्र से 9, मध्य प्रदेश और गुजरात से 7-7, कर्नाटक से 6, बिहार से 5 और राजस्थान से 4 मंत्री शामिल हैं। 26 मई, 2014 को शपथ लेने वाले 45 मंत्रियों में से केवल 15 ही मौजूदा मंत्रिपरिषद में अब तक बचे हैं।

इनमें राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान और स्मृति इरानी शामिल हैं। शुरुआती समूह के अन्य सदस्यों में वीके सिंह, नरेंद्र सिंह तोमर, राव इंद्रजीत सिंह, श्रीपद येसो नाइक, जितेंद्र सिंह, किरेन रिजिजू, कृष्ण पाल, संजीव बाल्यान और रावसाहेब दानवे शामिल हैं।

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First Published - July 14, 2023 | 11:06 PM IST

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