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बैंकिंग साख: बैंकर को कितने साल संभालनी चाहिए कमान?

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अमेरिका के शीर्ष 100 बैंकों में सबसे अधिक समय तक सीईओ के पद पर रहने वाले लोगों में रिचर्ड एडम्स (48 वर्षों तक) सबसे आगे हैं।

Last Updated- July 27, 2023 | 1:22 PM IST
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कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी (Kotak Mahindra Bank CEO) उदय कोटक 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उस दिन उनका लगभग 21 वर्ष लंबा कार्यकाल पूरा हो जाएगा। एचडीएफसी बैंक के पूर्व प्रमुख आदित्य पुरी के बाद कोटक भारत में इतनी लंबी पारी खेलने वाले एक मात्र बैंकर हैं। दोनों में एक अंतर हैः कोटक बैंक के प्रवर्तक हैं तो पुरी पेशेवर हैं।

इन दोनों के अलावा निजी बैंकों के वर्तमान सीईओ के रूप में डीसीबी बैंक के मुरली एम नटराजन (14 वर्षों से), फेडरल बैंक के श्याम श्रीनिवासन (साढ़े 12 वर्षों से अधिक समय से) और सिटी यूनियन बैंक के एन कामकोटि (12 वर्षों से) लंबी पारियां खेल रहे हैं।

जेम्स डाइमन  2005 से जेपी मॉर्गन चेज के चेयरमैन एवं सीईओ पद पर 

अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली पर विचार करते हैं। जेम्स डाइमन (67 वर्ष) 2005 से जेपी मॉर्गन चेज के चेयरमैन एवं सीईओ पद पर बने हुए हैं। फरवरी 2022 में अमेरिका में बैंकरों पर प्रकाशित एक आलेख में बैंक सीईओ के कार्यकाल में उन कई लोगों का जिक्र है जो दशकों से कमान संभाल रहे हैं। अमेरिका के शीर्ष 100 बैंकों में सबसे अधिक समय तक सीईओ के पद पर रहने वाले लोगों में रिचर्ड एडम्स (48 वर्षों तक) सबसे आगे हैं।

उन्होंने यूनाइटेड बैंकशेयर्स और इसके पूर्ववर्ती पार्कर्सबर्ग बैंक का 1975 से नेतृत्व किया है। जॉर्ज ग्लीसन बैंक ओजेडके की कमान 43 वर्षों से संभाल रहे हैं और इनके बाद जेम्म हर्बर्ट का नाम आता है, जो 37 वर्षों से फर्स्ट रिपब्लिक बैंक का नेतृत्व कर रहे थे। ऐसे कई अन्य नाम भी हैं।

इजीरिया, घाना और म्यांमार में भी बैंक सीईओ का कार्यकाल तय

भारत की तरह नाइजीरिया, घाना और म्यांमार में बैंक सीईओ का कार्यकाल तय कर दिया गया है। किसी भी दूसरे कारोबार से इतर बैंकिंग एक ऐसा क्षेत्र है जहां नेतृत्वकर्ता की भूमिका सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होती है। प्रायः किसी बैंक को उसके सीईओ के व्यक्तित्व से परिभाषित किया जाता है।

एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक दोनों ही अपने-अपने सीईओ के कार्यों से परिभाषित किए जाते हैं। यह भी सच है कि ऐसे बैंकर भी हैं जिन्होंने एक संस्थान से भी आगे अपनी पहचान बनाने के मद में स्वयं के लिए और अपने बैंकों एवं स्वयं के लिए मुश्किलें आमंत्रित की हैं।

दो बड़े बैंकों के सीईओ का कार्यकाल इस साल अक्टूबर में पूरा होगा

आईसीआईसीआई बैंक के संदीप बख्शी और एचडीएफसी बैंक के शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल इस साल अक्टूबर में पूरा हो जाएगा। बख्शी मई 2030 तक और जगदीशन मार्च 2035 तक अपने पदों पर बने रहे सकते हैं, बशर्ते आरबीआई उनके कार्यकाल दोबारा बढ़ाए जाने की अनुमति दे दे।

आरबीआई ने इंडसइंड बैंक के सीईओ सुमंत कठपालिया को मार्च 2025 तक पद पर रहने की अनुमति दी है। मार्च 2020 से अपने पद पर आसीन कठपालिया दिसंबर 2031 में 70 वर्ष के हो जाएंगे।

आईडीएफसी कैपिटल फर्स्ट बैंक के सीईओ वी वैद्यनाथन का वर्तमान कार्यकाल दिसंबर 2024 में पूरा हो रहा है। बंधन बैंक के चंद्रशेखर घोष का मौजूदा कार्यकाल जुलाई 2024 में समाप्त हो रहा है। सिद्धांत रूप में वह अगस्त 2030 तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। ये सभी निजी क्षेत्र के बैंकर हैं।

पंजाब नैशनल बैंक के अतुल कुमार का कार्यकाल दिसंबर 2024 में पूरा हो जाएगा

अब सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों के प्रमुखों पर विचार करते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी देवदत्त चंद का वर्तमान कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो जाएगा, मगर वह जनवरी 2031 तक अपने पद पर बने रहेंगे। बैंक ऑफ इंडिया के प्रमुख रजनीश कर्नाटक का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है मगर वह जुलाई 2030 तक पद पर रह सकते हैं।

पंजाब नैशनल बैंक के अतुल कुमार का कार्यकाल दिसंबर 2024 में पूरा हो जाएगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की सीईओ ए मणिमेखलाई का कार्यकाल जून 2025 तक समाप्त हो जाएगा। नौ महीने बाद मार्च 2026 में वह 60 वर्ष की हो जाएंगी। इंडियन बैंक के शांति लाल जैन दिसंबर 2024 में 60 वर्ष के हो जाएंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल अगस्त 2024 में समाप्त हो जाएगा। क्या 60 वर्ष पूरा होने से पहले ही उन्हें पद छोड़ना होगा?

पहले भी ऐसे अवसर दिखे हैं जब राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रमुखों ने अपने कार्यकाल पूरे किए हैं मगर 60 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। के आर कामत और राजीव ऋषि ऐसे दो उदाहरण हैं। हाल में बैंक ऑफ इंडिया के प्रमुख अतनु कुमार दास भी 60 वर्ष पूरा होने से कुछ महीने पहले सेवानिवृत्त हो गए।

राष्ट्रीयकृत बैंकों में शीर्ष पद पर नियुक्ति शुरू में पांच वर्षों के लिए हो सकती है

नवंबर 2022 में वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रीयकृत बैंकों में शीर्ष पद पर नियुक्ति शुरू में पांच वर्षों के लिए हो सकती है और बाद में पांच साल के लिए कार्यकाल और बढ़ाया जा सकता है। मगर सेवानिवृत्ति की उम्र के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। पहले तीन साल तक या 60 वर्ष की उम्र पूरी होने तक, इनमें जो भी पहले हो, का प्रावधान था।

एमडी और कार्यकारी निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाने का एक संभावित कारण यह है कि वरिष्ठ स्तर पर कम उम्र के बैंकरों की भरमार है। चूंकि, अब ऐसे बैंकों की संख्या अब कम हो गई है, इसलिए शीर्ष स्तर पर अधिक पदों की गुंजाइश नहीं बची है। मगर बदलाव के बाद भी कुछ ईडी- जिनकी प्रोन्नति एमडी के रूप में नहीं होती है- को 60 वर्ष से पहले ही सेवानिवृत्त होना पड़ सकता है।

भारतीय स्टेट बैंक का चेयरमैन अपने पद पर 60 वर्ष उम्र पूरी होने के बाद भी बना रह सकता है। उनका कार्यकाल सामान्य तौर पर तीन वर्षों का होता है मगर कुछ अपवाद भी हुए हैं और कार्यकाल बढ़ाए गए हैं।

राष्ट्रीयकृत बैंकों में पूर्णकालिक निदेशकों को 10 वर्षों तक सेवा विस्तार देना अपनी जगह ठीक है मगर उसी तरह निजी बैंकों में सेवानिवृत्ति उम्र 70 साल तक क्यों नहीं किया जा सकता? हमें दो नियम तय करने की जरूरत क्यो है?

आरबीआई ने उन बैंकरों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है जो संचालन को लेकर समझौता करते हैं मगर तब भी खराब प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ यह अधिक धैर्य दिखा रहा है। सीईओ को नया कार्यकाल मंजूर करने को लेकर भी नियामक को अपने दृष्टिकोण में एकरूपता बरतने की जरूरत है।

हाल में कम से कम एक मौका ऐसा आया है जब एक निजी बैंक के प्रमुख को उसके बोर्ड से तीन वर्ष का कार्यकाल दिए जाने के सुझाव के बाद भी आरबीआई ने मात्र एक साल की अनुमति दी। आरबीआई ने इसके बाद तीन वर्षों का कार्यकाल दे दिया ! क्या इससे उलझन की स्थिति पैदा नहीं होती है।

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First Published - July 26, 2023 | 10:48 PM IST

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