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ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव: 50 दिन से घटकर 28 दिन पर आई इन्वेंट्री, गाड़ियों के लिए बढ़ा वेटिंग पीरियड

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मजबूत मांग के चलते कारों का स्टॉक तेजी से घटा है। थोक के मुकाबले खुदरा बिक्री बढ़ने से अब बाजार आपूर्ति संबंधी बाधाओं का सामना कर रहा है

Last Updated- April 20, 2026 | 2:31 AM IST
Cars (Auto Sector)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहन बाजार में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है। एक साल के भीतर ही बाजार में अनबिके वाहनों के ज्यादा होने की समस्या से बदलकर अब आपूर्ति संबंधी बाधा का सामना करना पड़ा है। हालांकि अंतर्निहित मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

वाहन डीलरों के संगठन फाडा के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री इसके पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 13 फीसदी बढ़कर 47 लाख वाहनों तक पहुंच गई। यह वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम द्वारा दी गई थोक बिक्री के आंकड़े से अधिक है। सायम के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 7.9 फीसदी बढ़कर 46.4 लाख वाहन रही। थोक और खुदरा बिक्री में अंतर दर्शाता है कि वाहन डीलरों को आपूर्ति की तुलना में अंतिम बिक्री अधिक रही, जो विनिर्माता स्तर पर आपूर्ति की तंगी का संकेत देता है। थोक बिक्री के तहत विनिर्माता डीलरों को वाहनों की आपूर्ति करते हैं।

इस असंतुलन की वजह से डीलरों की इन्वेंट्री में तेजी से सुधार आया है। वाहन डीलरों का स्टॉक सामान्य होकर लगभग 28 दिन की बिक्री के बराबर आ गया है, जो एक साल पहले 50 दिन से ज्यादा था। यह आपूर्ति और मांग के बीच एक बेहतर संतुलन का संकेत है। वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत के मुकाबले इसमें बदलाव साफ दिख रहा है क्योंकि उस समय अनबिके वाहनों का स्टॉक बढ़ रहा था जबकि खुदरा बिक्री की रफ्तार सुस्त थी।

वर्तमान रुझान बताती है कि शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग मजबूत बनी हुई है। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में कटौती से ग्राहकों की क्रय श​क्ति बढ़ने और नए वाहनों के बाजार में आने से बिक्री को बढ़ावा मिला है। हालांकि थोक बिक्री के मुकाबले खुदरा बिक्री में तेजी से हो रही बढ़ोतरी, उत्पादन और आपूर्ति में आ रही रुकावटों को भी उजागर करती है। पिछले साल बचे हुए स्टॉक की समस्या के बाद अब वाहन कंपनियां संतुलित रुख अपना रही हैं।

यात्री वाहन बाजार में करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली अग्रणी कंपनी मारुति सुजूकी ने संकेत दिया है कि उत्पादन संबंधी बाधाएं अगले कुछ महीनों तक बनी रह सकती हैं। पूरी श्रृंखला में मांग मजबूत होने के बावजूद थोक बिक्री में वृद्धि अपेक्षाकृत नरम रही है, जो बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति बढ़ाने में दिक्कत का संकेत देती है। कुछ वाहनों के मॉडल के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि और विशिष्ट संस्करण की कमी आपूर्ति पक्ष की चुनौतियों को और बढ़ा रही हैं।

फाडा के आंकड़ों के अनुसार वाणिज्यिक वाहन खंड में वित्त वर्ष 2026 में थोक बिक्री 12.6 फीसदी बढ़कर 10.8 लाख वाहन रही जो 10.6 लाख खुदरा बिक्री वृद्धि से थोड़ा अधिक है। हालांकि यह अंतर मामूली है जो दर्शाता है कि विनिर्माता बुनियादी ढांचे की गतिविधियों और माल ढुलाई से निरंतर मांग की उम्मीद में इन्वेंट्री बढ़ा रहे हैं। साथ ही यह खंड ईंधन की कीमतों, ब्याज दर और व्यापक आर्थिक चक्र के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, जो मांग की दृश्यता को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी ओर, दोपहिया वाहनों में मांग में सुधार स्पष्ट तौर पर दिखाई देता है। इस सेगमेंट में खुदरा बिक्री 13.4 फीसदी बढ़कर 2.14 करोड़ वाहन रही जबकि थोक आपूर्ति 2.17 करोड़ वाहन की रही। यह इंगित करता है कि डीलर शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग में सुधार का लाभ उठाते हुए इन्वेंट्री को कम कर रहे हैं।

कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2026 विभिन्न क्षेत्रों में उच्च वृद्धि का वर्ष रहा है, खुदरा और थोक प्रवृत्तियों के बीच अंतर उद्योग के भीतर विशिष्ट अंतर्निहित गतिशीलता को उजागर करता है। यात्री वाहन तंग आपूर्ति के दौर में प्रवेश कर रहे है जबकि मांग मजबूत बनी हुई है। वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में इन्वेंट्री तैयार करने शुरुआती संकेत दिखा रहे हैं और दोपहिया वाहनों की मांग में सुधार दिख रहा है। वित्त वर्ष 2027 में वाहन विनिर्माताओं के लिए उत्पादन, इन्वेंट्री और आपूर्ति रणनीतियों को इस तरह से प्रबं​धित करना होगा कि अतिरिक्त स्टॉक जमा न हो, खास तौर पर यात्री वाहन खंड में।

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First Published - April 20, 2026 | 2:31 AM IST

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