प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पूरे भारत में लगभग 30,000 ऑटोमोबाइल डीलरों के प्रतिनिधि संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने कहा है कि उसे देश भर में डीलरों के अपने नेटवर्क से ई20 पेट्रोल से जुड़ी एक भी लिखित शिकायत नहीं मिली है। इससे सरकार के उस दावे को बल मिलता है कि ज्यादा एथेनॉल-वाला ईंधन वाहनों के लिए सुरक्षित है।
फाडा के अध्यक्ष सी एस विघ्नेश्वर ने पत्रकारों से कहा कि एसोसिएशन ने अपनी जनरल काउंसिल से संपर्क किया है। इस काउंसिल में अलग-अलग राज्यों और गाड़ियों के सेगमेंट से जुड़े लगभग 60-65 डीलर प्रतिनिधि शामिल हैं। उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि क्या ग्राहकों ने ई20 पेट्रोल से जुड़ी कोई समस्या बताई है।
विघ्नेश्वर ने कहा, ‘हमें ऐसी एक भी समस्या नहीं मिली है जिसमें ग्राहक ने ई20 ईंधन की वजह से किसी तरह की दिक्कत की बात कही हो। हमारी जनरल काउंसिल ने ई20 से संबंधित समस्या के बारे में एक भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।’
यह बयान पुराने पेट्रोल वाहनों में ई20 ईंधन के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। कई सोशल मीडिया पोस्ट और ग्राहकों के दावों में इससे इंजन खराब होने, जंग लगने और माइलेज घटने की बात कही जा रहा है।
ग्राहकों की चिंताओं को दूर करने के लिए फाडा ने वाहन कंपनियों के साथ मिलकर देश भर में जागरूकता अभियान शुरू किया है। विघ्नेश्वर के अनुसार डीलरों ने अपनी-अपनी कंपनियों (ओईएम) से मिले दिशा-निर्देशों के आधार पर बैनर लगाना और ग्राहकों को जानकारी देना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘हमारे ग्राहक सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सेदार हैं। हम निर्माताओं से मिली तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर उनकी चिंताओं को दूर करना चाहते हैं।’
केंद्र सरकार, तेल विपणन कंपनियों और वाहन निर्माताओं का कहना है कि ई20 ईंधन उन वाहनों के लिए सुरक्षित है जिनमें इसके इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। कई वाहन निर्माताओं ने यह भी कहा है कि मौजूदा वाहन बिना किसी विपरीत असर के इस ईंधन पर चल सकते हैं।
विघ्नेश्वर ने कहा कि फाडा के पास इंजीनियरिंग दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की तकनीकी क्षमता नहीं है और इसलिए वह वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों और सरकारी एजेंसियों पर निर्भर है। इन सभी का कहना है कि ई20 सुरक्षित है।
उन्होंने कहा, ‘जब ओईएम, तेल विपणन कंपनियां और सरकारी एजेंसियां सब मिलकर एक सुर में कहती हैं कि यह ईंधन सुरक्षित है, तो हम इसे मान लेते हैं क्योंकि हमारे पास इसके प्रतिकार में कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।’
विघ्नेश्वर ने माना कि सोशल मीडिया पर ई20 को लेकर चिंताएं तेजी से फैली हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि ज्यादातर चर्चाओं में ठोस सबूतों की कमी है। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई ऐसा वैज्ञानिक डेटा पेश कर सके जिससे पता चले कि ई20 की वजह से ये समस्याएं हो रही हैं, तो इस पर बहस की जा सकती है। अभी तक तो हमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है।’