प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश करने वाली लार्जकैप म्युचुअल फंड योजनाओं को निवेश के एक अहम पैमाने के हिसाब से अच्छा रिटर्न देने में मुश्किल हो रही है। उनके सामने गिरावट के जोखिम की चुनौती है। यह पैमाना है-सोर्टिनो रेश्यो।
सोर्टिनो रेश्यो यह बताता है कि किसी योजना में हर यूनिट पर नुकसान के जोखिम के बदले कितना रिटर्न मिलता है। अगर रेश्यो 1 से कम है, तो इसका मतलब है कि योजना का अतिरिक्त रिटर्न उठाए जा रहे नुकसान के जोखिम से कम है। यह शार्प रेश्यो का ही एक रूप है और उन निवेशकों के लिए ज्यादा सटीक है जो गिरावट के जोखिम से बचना चाहते हैं।
वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अलग-अलग श्रेणियों की सक्रियता से प्रबंधित डायरेक्ट इक्विटी योजना में से किसी भी लार्ज-कैप योजना ने तीन साल की अवधि में 1 से ज्यादा सोर्टिनो रेश्यो दर्ज नहीं किया। यह आंकड़ा 7 जुलाई तक का है यानी उस दिन का, जब ट्रंप ने ईरान के साथ फिर से तनाव बढ़ने की घोषणा की थी और इसके बाद बाजार में फिर से उतार-चढ़ाव शुरू हो गया था। यह आंकड़ा बाजार के ज्यादा जोखिम के बीच रिटर्न देने की क्षमता को समझने के लिए अहम संकेत है।
सिर्फ 21.7 फीसदी फ्लेक्सी-कैप फंड ही 1 से ज्यादा सोर्टिनो रेश्यो हासिल कर पाए हैं। वैल्यू रिसर्च के अनुसार हालांकि फ्लेक्सी-कैप फंड अलग-अलग आकार की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर निवेश लार्ज-कैप कंपनियों में ही किया जाता है। दूसरी ओर, जिन फंडों ने पूरी तरह से मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश किया है, उन्होंने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। दोनों श्रेणियों की ज्यादातर योजनाओं का सोर्टिनो रेश्यो 1 से ज्यादा है।
प्राइमइन्वेस्टर के वरिष्ठ म्युचुअल फंड विश्लेषक विपिन रामचंद्रन ने बताया कि सोर्टिनो रेश्यो, फंड के रिटर्न और जोखिम मुक्त दर के बीच के अंतर पर निर्भर करता है। महामारी के दौरान आई गिरावट की तुलना में जोखिम मुक्त दर ज्यादा रही है। जिस श्रेणी ने पिछले तीन सालों में ज्यादा रिटर्न दिया है, उसका रिटर्न भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा होगा और हो सकता है कि यह मिड-कैप सोर्टिनो रेश्यो ज्यादा होने से ही हो।
रामचंद्रन ने कहा, पिछले तीन सालों में मिड-कैप ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है। मिड-कैप श्रेणी में सिर्फ ऐक्टिव योजनाओं ने ही नहीं बल्कि पूरी श्रेणी ने 3 साल की अवधि में 19.09 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से रिटर्न दिया है। यह स्मॉल-कैप योजनाओं (17.95 फीसदी), फ्लेक्सी-कैप स्कीमों (13.27 फीसदी) और लार्ज-कैप स्कीमों (11.49 फीसदी) से ज्यादा है।
इसका ज्यादातर असर इंडेक्स के प्रदर्शन की वजह से हुआ है, जिसने कुछ श्रेणियों को दूसरों के मुकाबले ज्यादा फायदा पहुंचाया है। बीएसई लार्जकैप इंडेक्स ने पिछले तीन सालों में 9.3 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से रिटर्न दिया है। बीएसई मिडकैप इंडेक्स के लिए यह 18.2 फीसदी और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स के लिए 19.1 फीसदी रहा है।
इस श्रेणी में काफी अंतर है। फ्लेक्सी-कैप श्रेणी के लिए सबसे ज्यादा सोर्टिनो रेश्यो 1.59 था, जबकि सबसे कम -0.2 था। लार्ज-कैप श्रेणी का सोर्टिनो रेश्यो 0.32 से 0.86 के बीच था। मिड-कैप क्षेत्र के लिए यह 0.51 से 1.4 के बीच था। स्मॉल-कैप योजनाओं में यह रेंज 0.65 से 1.66 के बीच थी।
ट्रांसेंड कैपिटल के निदेशक कार्तिक जवेरी ने बताया कि कई लार्ज-कैप कंपनियों की कमाई में सीमित बढ़ोतरी और खराब परिदृश्य के कारण उनके शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। वहीं, कई मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों ने कमाई और शेयर के प्रदर्शन, दोनों मामलों में बेहतर काम किया है। यह इन श्रेणियों के सोर्टिनो रेश्यो में भी दिखेगा। जवेरी के मुताबिक जब बाजार का चक्र बदलेगा तो सभी श्रेणियों में रेश्यो बेहतर हो सकते हैं। उन्होंने कहा, अपना आवंटन बनाए रखें, देर-सबेर हालात जरूर सुधरेंगे।