केरल उच्च न्यायालय ने राज्य के वायनाड जिले में आदिवासियों का कथित तौर पर जबरन बंध्याकरण किए जाने की घटना की जांच के लिए दायर याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किये हैं।
आदिवासी संगठन केरल प्रक्थान गोथार संगम ने याचिका में आरोप लगाया है कि नवंबर 2010 में कम से कम 40 आदिवासी पुरूषों का सुल्तान बाथरे स्थित तालुक अस्पताल में जबरन बंध्याकरण किया गया।
संगठन के अध्यक्ष सीके कृष्णनन ने आरोप लगाया कि सामूहिक बंध्याकरण कोलपारा, पुथुमल और चूरालमला सहित कई स्थानों पर आकस्मिक और अनाड़ी तरीके से किया गया, जिसका स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा। बंध्याकरण के बाद वर्ष 2010 में एक आदिवासी की मौत हो गई।
राज्य के अटार्नी पी विजयराघवन ने कहा कि केंद्र सरकार के छोटा परिवार सुखी परिवार की नीति के हिस्से के रूप में बंध्याकरण किया गया और ऐसा लोगों की सहमति से किया गया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर और न्यायमूर्ति एएम शफीक की सदस्यता वाली खंडपीठ ने याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किये ।