न्यायमूर्ति डी एच वाघेला और न्यायमूर्ति जेड के सैयद की खंडपीठ ने कहा कि वह कैट की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
याचिका में शर्मा के खिलाफ कार्रवाई पर कैट की ओर से लगाई गयी रोक के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गयी थी।
सरकार द्वारा आज दिये गये आश्वासन के बाद उच्च न्यायालय ने कैट के आदेश को भी बदल दिया। सरकार ने कहा था कि वह शर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। अब कैट द्वारा राज्य सरकार को शर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने के बजाय आदेश यह कहा जाएगा कि राज्य ने कैट के समक्ष याचिका लंबित रहने तक कोई कार्रवाई नहीं करने की पेशकश की है।
अदालत ने यह भी कहा कि कैट को तीन महीने के भीतर मामले में सुनवाई करनी चाहिए।
शर्मा ने अपने उपर कदाचार के आरोपों को लेकर गुजरात सरकार की ओर से दाखिल आरोपपत्र को चुनौती देते हुए सितंबर, 2011 में कैट में गुहार लगाई थी।
शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने जांच से हटने के बाद 2002 के दंगों की अवधि से संबंधित मोबाइल फोन कॉल रिकार्ड की मूल सीडी जांच अधिकारी या अपने वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं सौंपी।
भाषा