दिल्ली की एक अदालत को आज बताया गया कि 10 जनवरी, 2008 को संचार भवन में आोजित बैठक में शामिल दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को पहले से यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम के संदर्भ में आशय पत्र वितरित करने के लिए बुलाया गया है।
दूरसंचार विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी अशोक कुमार धर ने विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी की अदालत के समक्ष गवाही में कहा कि उन्हें आशय पत्र वितरण की प्रक्रिया के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी और तत्कालीन उप महानिदेशक एके श्रीवास्ताव इस मामले के प्रभारी थे।
सीबीआई के गवाह के तौर पर उपस्थित हुए धर ने कहा कि जिस दिन आशय पत्र वितरित किया जाना था, उसी दिन उन्हें और विभाग के तीन अन्य अधिकारियों को उनके वरिष्ठ ने संचार भवन के बैठक कक्ष में बुलाया। इसके बाद बताया गया कि उन्हें संचार कंपनियों के प्रतिनिधियों को आशय पत्र वितरित करना है।
धर ने अदालत से कहा, जब हम सभी बैठक कक्ष में उपस्थित हुए तो हमें वहां बुलाने के मकसद के बारे में बताया गया।