मंत्रिमंडल बिजली वितरण कंपनियों के करीब दो लाख करोड़ रुपए के रिण पुनर्गठन प्रस्ताव पर जल्दी ही विचार कर सकता है। इन कंपनियों की खस्ताहाली ने बैंकिंग कर्ज वापसी में चूक होने की चिंता पैदा कर दी है।
बिजली मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक वितरण कंपनियों के दो लाख करोड़ रुपए तक के रिण के पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
बिजली सचिव पी उमा शंकर ने आज यहां कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य है वितरण कंपनियों को सहायता प्रदान करना।
उन्होंने कहा सख्त सुधार नियमों पर आधारित यह अंतरिम वित्तीय व्यवस्था होगी ... मंत्रिमंडल अगले 15 से 20 दिनों के भीतर इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है।
एक अन्य अधिकारी ने प्रेट्र से कहा कि रिण के करीब 50 फीसद हिस्से को बांड में तब्दील किया जाएगा जो संबंधित राज्य सरकारें जारी करेंगी। वित्त मंत्रालय इस योजना के पक्ष में है।
उन्होंने कहा कि शेष 50 फीसद रिण का पुनर्गठन किया जाएगा। वितरण कंपनियांे को तीन साल की स्थगन अवधि की सुविधा मिलेगी और इस दौरान उन्हें रिण की मूल राशि का भुगतान नहीं करना होगा।
इसके बाद वितरण कंपनियों को सात साल में पूरे रिण का भुगतान करना होगा।
उन्होंने कहा हमने राज्य की वितरण कंपनियों से भी कहा है कि वे अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के संबध्ंा में निश्चित योजना लेकर आएं। वितरण कंपनियांे को नकदी मुनाफा :तीन साल के भीतर: से जुड़ी योजना भी पेश करनी होगी।
वित्त मंत्री, बिजली मंत्रालय और योजना आयोग ने वितरण कंपनियों की रिण देनदारी के पुनर्गठन के संबंध में मिलकर काम किया है।