Advertisement
अमेरिका से संबंध होंगे और मजबूत! विक्रम मिसरी और मार्को रूबियो के बीच हुई जरूरी बैठक​पाकिस्तान की मध्यस्थता लेकिन असली खेल तो मुनीर का है!LPG की किल्लत और कच्चे माल के बढ़ते दाम: दक्षिण एशिया के सबसे बड़े लघु उद्योग हब में मंदी की आहटभाजपा का बंगाल विजन: सरकार बनने के 6 महीने में UGC लागू करने और महिलाओं को ₹3000 भत्ते का वादामहंगे स्मार्टफोन से डिजिटल इंडिया को झटका, GST कटौती और सब्सिडी से ही बढ़ेगी मांगन्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों में तूफानी तेजी: एक दिन में करीब 20% उछला भाव, प्रीमियम कलेक्शन में भी सुधारसंघर्ष विराम की अनिश्चितता के बीच कैसा रहेगा बाजार का रुख? जानें 5 ब्रोकरेज की रायतामारा लीजर्स का बड़ा निवेश प्लान: अगले 5 साल में ₹600 करोड़ से दोगुना होगा होटलों का पोर्टफोलियोमांग की अनिश्चितता से आईटी शेयरों पर दबाव, निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% तक टूटाभारतीय बाजार में पियरे लैनियर की बड़ी दस्तक, पहले ही साल 10 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य
अन्य समाचार एनआरसी बनाने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी: अमित शाह
'

एनआरसी बनाने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी: अमित शाह

PTI

- August,03 2018 5:44 AM IST

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को 1985 में कांग्रेस द्वारा घोषित योजना का परिणाम बताते हुये आज कहा कि इसे लागू करने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी इसलिये यह योजना अब तक लंबित रही।

असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर आज राज्यसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुये शाह ने कहा कि 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते के तहत एनआरसी बनाने की घोषणा की थी। एनआरसी को असम समझौते की आत्मा बताते हुये उन्होंने कहा ‘‘एनआरसी को अमल में लाने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी, हममें हिम्मत है इसलिये हम इसे लागू करने के लिये निकले हैं।’’

शाह ने एनआरसी को लागू करने पर देश में क्षेत्रीय एवं भाषायी आधार पर राज्यों के बीच टकराव शुरू होने की विपक्ष की आशंकाओं और आरोपों को गलत बताते हुये कहा कि सदन में इस बात की भी चर्चा होनी चाहिये कि एनआरसी लाने की जरूरत क्यों पड़ी।

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement