नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को 1985 में कांग्रेस द्वारा घोषित योजना का परिणाम बताते हुये आज कहा कि इसे लागू करने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी इसलिये यह योजना अब तक लंबित रही।
असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर आज राज्यसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुये शाह ने कहा कि 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते के तहत एनआरसी बनाने की घोषणा की थी। एनआरसी को असम समझौते की आत्मा बताते हुये उन्होंने कहा ‘‘एनआरसी को अमल में लाने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी, हममें हिम्मत है इसलिये हम इसे लागू करने के लिये निकले हैं।’’
शाह ने एनआरसी को लागू करने पर देश में क्षेत्रीय एवं भाषायी आधार पर राज्यों के बीच टकराव शुरू होने की विपक्ष की आशंकाओं और आरोपों को गलत बताते हुये कहा कि सदन में इस बात की भी चर्चा होनी चाहिये कि एनआरसी लाने की जरूरत क्यों पड़ी।