बिजनेस स्टैंडर्ड - खाद्य तेल आयात बढऩे से नुकसान
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, July 21, 2019 04:01 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

खाद्य तेल आयात बढऩे से नुकसान

दिलीप कुमार झा / मुंबई April 18, 2019

देश में वनस्पति तेल के बढ़ते आयात ने घरेलू तिलहन के पेराई और रिफाइनिंग उद्योग को अपनी परिचालन क्षमता में ऐतिहासिक स्तर की कटौती करने का दबाव बना दिया है। उद्योग के शीर्ष संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के अनुसार मार्च 2019 के दौरान भारत के वनस्पति तेलों (कच्चा पाम तेल या सीपीओ और रिफाइंड, ब्लीच्ड और डिओडोराइज्ड या आरबीडी) के आयात में 26 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई और यह बढ़कर 14.5 लाख टन हो गया है जबकि पिछले साल इस अवधि में यह 11.5 लाख टन था। फरवरी में भी वनस्पति तेल का आयात 7.4 प्रतिशत उछलकर 12.4 लाख टन हो गया था जबकि पिछले साल इस महीने में यह 11.6 लाख टन था।
 
कमी के कारण भारत की लगभग 60 प्रतिशत मांग मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना से आयात के जरिये पूरी की जाती है। इनके आयात में लगातार वृद्धि ने घरेलू तिलहन पेराई और रिफाइनिंग इकाइयों के सामने परेशानी पैदा कर दी है। चूंकि आयातित रिफाइंड तेल घरेलू तेल के उत्पादन की तुलना में सस्ता पड़ता है इसलिए यहां की पैकेजिंग इकाइयां सुरक्षित लाभ मार्जिन के लिए रिफाइंड तेल का आयात करती हैं और इसे पैक करके बेचना पसंद करती हैं। इस कारण घरेलू रिफाइनरी उद्योग ने अपनी परिचालन क्षमता महज 30 प्रतिशत तक सीमित कर दी है। 
 
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने कहा कि वनस्पति तेलों का आयात बढ़ाना भारतीय रिफाइनरियों और तिलहन किसानों - दोनों के लिए हमेशा चिंता का विषय रहता है। इसलिए इसकी आपूर्ति पर अंकुश जरूरी है। खाद्य तेलों के बढ़ते आयात का घरेलू तिलहन के दामों पर गंभीर असर पड़ा है। हाजिर बाजार में मंूगफली और सरसों /सफेद सरसों के दाम उनके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से करीब 20 प्रतिशत कम पर चल रहे हैं। उद्योग के सूत्रों के अनुसार तिलहन की पेराई करने वाली इकाइयों और खाद्य तेल रिफाइनरियों ने अपनी परिचालन लागत कम करने और कारोबार को व्यावहारिक बनाने के लिए परिचालन क्षमता घटा दी है। 
 
इस बीच मार्च में कुल आयातित रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी क्रमबद्ध रूप से लगातार बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है जो फरवरी में 20 प्रतिशत थी और जनवरी में 14 प्रतिशत। घरेलू रिफाइनरियों में कच्चे पाम तेल के प्रसंस्करण का लाभ मार्जिन कम है। इसलिए देश की प्रसंस्करण इकाइयां कच्चे तेल की अपेक्षा रिफाइंड तेल के आयात पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। भारतीय वनस्पति तेल प्रसंस्करण इकाइयों को दो प्रमुख दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यूरोपीय संघ ने जैव-ईंधन में कच्चे पाम तेल का उपयोग स्थगित करने का फैसला किया है। इसलिए मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे उत्पादक देश रिफाइंड तेल की आपूर्ति भारत की तरफ बढ़ा रहे हैं। इससे कच्चे पाम तेल और आरबीडी दोनों ही की आपूर्ति का रुख भारत और चीन जैसे बाजारों की ओर है। इस कारण भारत वनस्पति तेलों के लिए डंपिंग मैदान साबित हो रहा है।
 
मलेशिया के साथ द्विपक्षीय संधि के तहत भारत सरकार ने 1 जनवरी, 2019 से आरबीडी और कच्चे पाम तेल पर प्रभावी आयात शुल्क 59.40 प्रतिशत और 48.40 प्रतिशत के स्तर से घटाकर क्रमश: 49.50 प्रतिशत और 44 प्रतिशत कर दिया है। इंडोनेशिया से आयात किए जाने वाले कच्चे पाम तेल और आरबीडी पर भी आयात शुल्क 48.40 प्रतिशत और 59.40 प्रतिशत के स्तर से घटाकर 1 जनवरी, 2019 से 44 प्रतिशत और 55 प्रतिशत कर दिया गया है। एसईए ने सरकार को आयात शुल्क पांच प्रतिशत कम करने की सलाह दी है।
Keyword: edible oil, export, import,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के संकेत के बाद कर्ज सस्ता करेंगे बैंक?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.